जांच में सामने आया है कि जैसे-जैसे शिकायतें बढ़ीं और पुलिस की दबिश तेज हुई, शमशाद ने गोंडा से निकलकर पहले बिहार में शरण ली। वहां से वह कोलकाता पहुंचा। सूत्र बताते हैं कि उसने कोलकाता से बागडोगरा की यात्रा और वहां से विदेश जाने के लिए टिकट भी ले लिया। आशंका है कि वह किसी खाड़ी देश या पड़ोसी देश में लंबे समय तक रहने की योजना बना चुका था। कोलकाता एयरपोर्ट पर समय रहते अलर्ट जारी होने के कारण उसे उड़ान भरने से पहले हिरासत में ले लिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कुछ घंटों की देरी होती तो आरोपी देश से बाहर भाग सकता था।
तीन नाम, एक संगठित नेटवर्क
आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने और भरोसा जीतने के लिए अलग-अलग जिलों में अलग नामों का इस्तेमाल किया। शमशाद के नाम से शुरुआती संपर्क और भरोसे का नेटवर्क तैयार किया। नरेंद्र बनकर कुछ जिलों में नई पहचान बनाई। इसके बाद विवेक नाम से गोंडा समेत 12 जिलों में सक्रिय हुआ। नाम बदलने की इस रणनीति से वह पीड़ितों और जांच एजेंसियों को भ्रमित करता रहा। अलग-अलग मोबाइल नंबर, बैंक खाते और दस्तावेज का उपयोग कर उसने खुद को पकड़ से दूर रखने का प्रयास किया।
ऐसे चलता था ठगी का पूरा मॉडल
पुलिस जांच के अनुसार ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित था। इसके लिए बेरोजगार युवाओं की पहचान कर गांव-गांव में एजेंटों के माध्यम से संपर्क किया। विदेश में नौकरी का झांसा देकर खाड़ी देशों में उच्च वेतन का दावा किया। फर्जी ऑफर लेटर और वीजा प्रोसेस के माध्यम से नकली दस्तावेज दिखाकर भरोसा जीता।
प्रोसेसिंग फीस की वसूली के लिए पासपोर्ट, मेडिकल, टिकट और वीजा शुल्क के नाम पर 50 हजार से लेकर 1.5 लाख रुपये तक लिए। यही नहीं, फंसाने के लिए कभी मेडिकल लंबित, कभी वीजा अटका बताकर महीनों तक टालमटोल किया। गोंडा में ही 200 से अधिक युवाओं से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है। इसके अलावा गोरखपुर, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, देवरिया, अयोध्या, श्रावस्ती, बाराबंकी, बहराइच और बलरामपुर समेत 12 जिलों में भी उसका नेटवर्क सक्रिय रहा।
तकनीकी जांच से खुला राज
एफआईआर दर्ज होने के बाद जब शिकायतों का दायरा बढ़ा तो साइबर सेल ने बैंक ट्रांजेक्शन, कॉल डिटेल और डिजिटल आईडी की जांच शुरू की। इसी दौरान विवेक नाम से सक्रिय व्यक्ति की असल पहचान शमशाद के रूप में सामने आई। पुलिस अधिकारियों ने बिहार और कोलकाता पुलिस से समन्वय स्थापित कर एयरपोर्ट अथॉरिटी को सतर्क किया। नतीजा यह रहा कि आरोपी को एयरपोर्ट के भीतर से ही पकड़ लिया गया।
जांच में उजागर होंगे कई अहम तथ्य
शमशाद को लाने के बाद पुलिस यह जानकारी जुटाएगी कि ठगी की कुल रकम कितनी और कहां ट्रांसफर हुई, किन-किन बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट का उपयोग हुआ। नेटवर्क में शामिल स्थानीय एजेंट कौन हैं?, क्या किसी ट्रैवल एजेंसी या दस्तावेज तैयार करने वाले की भूमिका है या नहीं। पुलिस सर्विलांस और एसओजी की मदद से मनी ट्रेल खंगालने में जुटी है।
ट्रांजिट रिमांड, आज आएगा मास्टरमाइंड
एएसपी पूर्वी मनोज रावत ने बताया कि बिहार के चंपारण जिला निवासी शमशाद को कोलकाता एयरपोर्ट पर पकड़ा गया था। सोमवार को कोलकाता में न्यायालय से रिमांड मिल गया है। मंगलवार की शाम तक पुलिस उसे लेकर गोंडा पहुंचेगी।