मई में मनकापुर क्षेत्र के कटहर बुटहनी गांव में खसरे से हुई आठ बच्चों की मौत मामले में स्वास्थ्य निदेशालय ने कड़ा रुख अपनाया है। निदेशालय प्रशासन के विशेष सचिव देवप्रताप सिंह ने मामले में तत्कालीन सीएमओ, एसीएमओ व मनकापुर के चिकित्साधीक्षक को नोटिस भेजकर 15 दिनों में जवाब मांगा है।
मई में मनकापुर के कटहर बुटहनी गांव में खसरा फैलने से चैतू की डेढ़ साल की पुत्री पुष्पा, भगवती का पुत्र अरविंद (2), सुबेदार का पुत्र सुजीत (2), विनोद का बेटा श्याम (3), छेदीलाल का पुत्र उमेश (5) व विनोद (3), खदेरू की पुत्री महिमा (12), पुत्र पंकज (3) की खसरे से मौत हो गई थी।
जबकि 38 लोग खसरे से ग्रसित पाए गए। मामले की जानकारी मिलने के बाद तत्कालीन आयुक्त देवीपाटन मंडल डॉ. रविप्रकाश अरोड़ा व अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. उमाकांत वर्मा ने जब गांव का मौका मुआयना किया तो पता चला कि गांव में न तो स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई टीकाकरण किया गया और न ही बीमारी फैलने के बाबत स्वास्थ्य अधिकारियों को इसका पता ही चला।
इसके बाद मामले में जिला प्रशासन ने क्षेत्रीय एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, सीडीपीओ, सुपरवाइजर, गांव के सचिव व सुपरवाइजर को दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के शिथिल नियंत्रण को लेकर किसी भी डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई मामले में नहीं की गई थी।
इसकी रिपोर्ट शासन में पहुंचने के बाद मामले में स्वास्थ्य निदेशालय के विशेष सचिव देवप्रताप सिंह ने तत्कालीन सीएमओ व जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. राकेश अग्रवाल, एसीएमओ डॉ. ओमप्रकाश व मनकापुर के चिकित्साधीक्षक डॉ. केएन गुप्त को नोटिस जारी कर उन्हें गांव में टीकाकरण न करने और गांव में भ्रमण कर बीमारी पर नजर न रखने का दोषी मानते हुए तीनों डॉक्टरों से जवाब मांगा है।