गोंडा। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट आलोक शर्मा की अदालत ने अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े एक मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने शिकायतकर्ता के खिलाफ झूठी गवाही के आरोप में कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है। मामला मनकापुर कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 2021 में दर्ज प्रकरण का है।
अभियोजन के अनुसार 11 जनवरी 2021 को अशरफपुर गांव स्थित तालाब में मछली पकड़ने के विवाद के दौरान बब्बल गिरी, राज किशोर और टन्ने पर संजय और दशरथ को जातिसूचक शब्द कहने, मारपीट करने तथा जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया था। इसी आधार पर एससी/एसटी एक्ट में केस दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता संजय अपने पूर्व बयान से मुकर गए। उन्होंने न्यायालय में कहा कि घटना रात में हुई थी, इसलिए वह आरोपियों की पहचान नहीं कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि मुकदमा उन्होंने अन्य लोगों के कहने पर दर्ज कराया था। घायल गवाह दशरथ तथा प्रत्यक्षदर्शी राजेंद्र प्रसाद कश्यप ने भी अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया और अपने पूर्व बयानों से पीछे हट गए।
अदालत ने बब्बल गिरी, राज किशोर और टन्ने को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। शिकायतकर्ता संजय ने पुलिस को दी गई तहरीर और न्यायालय में दिए गए बयान में स्पष्ट विरोधाभास रखा। इस आधार पर अदालत ने प्रथम दृष्टया झूठी गवाही का मामला बनते हुए उनके खिलाफ संबंधित विधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई प्रारंभ करने का आदेश दिया।