गोंडा। मरीजों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ से उपचार, जांच व बेहतर दवाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला खानापूर्ति तक सीमित रह गया। मेले में अधिकांश स्थानों पर न तो जांच की सुविधा मिलती है और न ही विशेषज्ञ चिकित्सक उनका इलाज करते हैं। कहीं फार्मासिस्ट तो कहीं आयुष चिकित्सक लाल पीली गोली देकर मरीजों को घर भेज देते हैं। इसी कारण मरीजों का भी आरोग्य मेले से मोहभंग हो गया है। रविवार को जिले के 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आरोग्य मेले के आयोजन का दावा किया गया। मेले की जमीनी हकीकत पर पेश है रिपोर्ट:
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काजीदेवर के तहत पंतनगर पीएचसी में दोपहर 12:25 बजे सन्नाटा पसरा हुआ था। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. पाटला पांडेय व फार्मासिस्ट दीपेश वर्मा अपने कक्ष में बैठे मरीजों का इंतजार कर रहे थे। वार्ड आया पूजा यादव बाहर लॉन में बैठकर मरीजों की राह देख रही थीं। डॉक्टर ने बताया कि सुबह से सिर्फ दो मरीज आए हैं। चर्म रोग की समस्या से पीड़ित मयंक व बुखार से पीड़ित उत्तम कुमार का इलाज किया गया। एलटी प्रसूता अवकाश पर हैं, इससे जांच नहीं हो पा रही है। डॉक्टर ने कहा कि मुहर्रम के कारण मरीज नहीं पहुंचे।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छपिया की पीएचसी वीरपुर में सुबह 11:40 बजे कोई डॉक्टर नहीं बल्कि फार्मासिस्ट अवधेश शुक्ल मरीजों का इलाज कर रहे थे। दोपहर तक 16 मरीजों का नाम ओपीडी रजिस्टर में दर्ज था। एलटी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ब्लड जांच करते दिखाई पड़े। फार्मासिस्ट ने बताया कि मेले में किसी भी आयुष, एमबीबीएस, विशेषज्ञ चिकित्सक या महिला चिकित्सक की ड्यूटी नहीं लगाई गई। खुद मरीजों का उपचार कर दवाएं देते हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छपिया की पीएचसी मसकनवा में सुबह 11:20 बजे आयुष चिकित्सक डॉ. पवन पटवा मरीजों का उपचार कर रहे थे। एलटी विजय प्रताप मरीजों के ब्लड की जांच करते तथा फार्मासिस्ट रमेश यादव दवाओं का वितरण करते दिखाई पड़े। डॉक्टर ने बताया कि मेले में किसी महिला स्वास्थकर्मी, एमबीबीएस, विशेषज्ञ चिकित्सक व महिला चिकित्सक की ड्यूटी नहीं लगाई गई।
आरोग्य मेले में क्या होनी चाहिए व्यवस्थाएं
-मेले में एमबीबीएस, आयुष व आरबीएसके के तीन से चार डॉक्टरों की उपस्थिति होनी चाहिए।
-मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट व पैरामेडिकल के प्रशिक्षुओं का सहयोग लिया जाना चाहिए।
-खून की सभी प्रकार की जांच व आवश्यक दवाओं की उपलब्धता होनी चाहिए।
-आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व एएनएम की ओर से स्टॉल लगाकर विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं में पंजीकरण करना चाहिए।
-नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संस्थागत प्रसव, टीकाकरण व स्तनपान के लिए जागरूकता लानी चाहिए।
-सभी पीएचसी पर कम से कम एक महिला चिकित्साधिकारी की उपस्थिति होनी चाहिए।