एक बार फिर वन महोत्सव पर जिले में हरियाली लाने की कवायद शुरू हो गई है। यह कवायद धरातल पर कम, कागजों पर ही अधिक दिखती है। इसकी गवाही पिछले वर्ष वन सहित विभिन्न विभागों द्वारा रोपे गए पांच लाख पौधे दे रहे हैं, जिनमें से अधिकांश पौधे सूख गए हैं।
वन विभाग एक जुलाई से आयोजित होने वाले वन महोत्सव की तैयारी में जुट गया है। वन विभाग को तीन लाख 58 लाख पौधे लगाए जाने का लक्ष्य दिया गया है, जबकि अन्य विभागों को एक लाख 92 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य सौंपा गया है।
बताते चलें कि पिछले वर्ष जिले में पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य था और वन सहित अन्य विभागों ने यह लक्ष्य पूरा भी किया, लेकिन अधिकतर पौधे जमीन के बजाय कागजों में ही लग गए। इस बार तीन लाख 58 हजार पौधे वन विभाग को लगाने हैं।
इसके अलावा विकास विभाग, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग, पीडब्ल्यूडी, समाज कल्याण, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला पंचायत आदि को एक लाख 92 हजार पौधे लगाने हैं।
वन सहित अन्य विभागों द्वारा जो पौधे लगाए भी जाते हैं, वह देखरेख के अभाव में सूख जाते हैं। वन विभाग द्वारा राजापुर, परेड सरकार, मनकापुर, मोतीगंज, खरगूपुर, इटियाथोक सहित अन्य क्षेत्रों में पिछले वर्षों में पौधे तो लगाए गए, लेकिन देखरेख के अभाव में इनमें से अधिकतर पौधे सूख गए।
पिछले पांच वर्षों में करीब 30 लाख पौधे विभिन्न विभागों द्वारा लगाए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन तीन लाख पौधे भी हरे नजर नहीं आए। गोंडा-लखनऊ मार्ग पर वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधे सूख गए। कहीं पौधों को पानी नहीं मिला तो कहीं पौधों की सुरक्षा के लिए लगाए गए ट्री गार्ड खुद ही गिर गए।
एक से सात जुलाई के बीच वन महोत्सव के दौरान जिले में पौधों की रोपाई की जाएगी। वन विभाग को तीन लाख 58 हजार पौधे लगाने हैं, जबकि अन्य विभागों को भी लक्ष्य दे दिया गया है। पौधों की सुरक्षा के लिए इंतजाम किए जाते हैं, जहां कहीं भी खामियां हैं, उन्हें दूर किया जाएगा। - टी रंगराजू, प्रभागीय वनाधिकारी