खैरा भवानी मंदिर में स्थापित मां की पिंडी। - संवाद
गोंडा। जिला मुख्यालय पर बड़गांव रेलवे क्रॉसिंग पार स्थित खैरा भवानी मंदिर सदियों पुराना है। किसी प्राचीन किले के आकार में बने मंदिर में शारदीय व वासंतिक नवरात्र व आषाढ़ माह में आयोजित होने वाले महीने भर के मेले में लाखों श्रद्धालु देवी का दर्शन व बच्चों का चूड़ाकर्म कर सरोवर में स्नान करते हैं। मंदिर के महंत कैलाशनाथ गिरि बताते हैं कि माता दुर्गा ने महिषासुर वध के बाद अपनी थकान दूर कर नवऊर्जा प्राप्त करने के लिए यहां लंबी अवधि तक विश्राम किया था। प्राचीन काल में यहां खैर का जंगल होने से मंदिर की स्थापना होने पर इसे खैरा भवानी कहा जाने लगा। यहां पिंडी रूप में खैरा देवी की पूजा की जाती है। मंदिर में रात्रि के अंतिम पहर में निकलने वाले नीर को नेत्ररोग की अचूक दवा माना जाता है। श्रद्धालु यहां पिंडी से निकलने वाले पवित्र नीर लेकर बच्चों की आंख में लगाते हैं।
मंदिर के नियमित सेवादार श्रद्धालु डाॅ. केआर त्रिपाठी बताते हैं कि खैरा देवी मंदिर परिसर में नवरात्र सहित वर्ष के सभी महीनों में देवी को समर्पित भंडारे व बच्चों के चूड़ाकर्म के आयोजन चलते रहते हैं। परिसर के पवित्र सरोवर में सैकड़ों दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।