करनैलगंज (गोंडा)। नदी का जलस्तर घटने के बाद भी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। 2.93 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होने से ग्रामीण चिंतित हैं। अब तक 28 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। हालांकि प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
जिले के ग्राम नकहरा, चंदापुर किटौली के 13 मजरे बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। ग्राम घरकुइयां, बहुवन मदार मांझा की आबादी प्रभावित नहीं है मगर इन गांवों के किसानों की खेती पूरी तरह से जलमग्न हो गई है। उधर, जिले की सीमा पर बसे बाराबंकी के ग्राम परसावल, कमियार, नैपुरा, मांझा रायपुर, चिलवारी, लोधेमऊ और बेहटा के चार पुरवे बेहटा डीहा, रेता पुरवा, चरपुरवा, गोड़ियनपुरवा के साथ ही ग्राम पारा, बांसगांव दक्षिणी, ग्राम असवा दक्षिणी भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं। स्थानीय निवासी दुर्गेश कुमार, शिवशंकर, शेखर, किशनलाल, रामपाल, सुखदेव आदि का कहना है कि बाराबंकी के बाढ़ प्रभावित गांवों में कोई भी अधिकारी झांकने नहीं आया है। न तो बाराबंकी के प्रशासन से कोई मदद मिली और न ही गोंडा के। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ ग्रामीण जो गोंडा जिले को सीमा में बस गए हैं या सुरक्षित स्थानों पर हैं, उन्हें लंच पैकेट आदि मिल रहा है। बाराबंकी जिले के बाढ़ पीड़ितों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है।
मैदानी इलाकों में कटान तेज
सरयू नदी के धीरे-धीरे घट रहे जलस्तर से कटान बढ़ गया है। मैदानी इलाकों में जबरदस्त कटान से ग्रामीणों के होश उड़ गए हैं। उनकी जमीन काटकर नदी में समा रही है। पहले फसल लगे खेत जलमग्न थे, अब वह नदी में समा रहे हैं।