जमीन का बगैर मुआवजा मिले ही नए रिंग बांध के हो रहे निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध भी धीरे-धीरे मुखर होने लगा है। मंगलवार को इसके चलते तमाम ग्रामीण उस समय जेसीबी के सामने आ गए, जब उनके खेतों पर जेसीबी चला दी गई। वहीं कई किसानों को इसका पता तक ही नहीं चला कि उनकी फसलों को कब उजाड़कर उसकी जगह नए बंधे का काम चालू करा दिया। ग्रामीणों के विरोध को लेकर मंगलवार को कई बार नए रिंग बांध का निर्माण कराने वाले ठेकेदार से उनकी नोकझोंक भी हुई।
एल्गिन-चरसडी बांध को बचाने का प्रयास तेजी से चल रहा है। इसकी सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए नया रिंग बांध बनाने का फैसला ले लिया गया और बांध बनाने का कार्य भी रविवार की शाम से प्रारंभ करवा दिया गया। लेकिन मुआवजा न मिलने से किसान इसके विरोध पर उतर आए हैं।
मंगलवार को इसे लेकर कई बार किसानों व ठेकेदार के बीच जमकर नोकझोंक हुई और किसान मौके पर नए रिंग बांध के निर्माण में लगी जेसीबी के सामने आ गए। लेकिन जिस विभाग की तरफ से इसका निर्माण कराया जा रहा है, उसके अधिकारी इस मामले में उलझने से बचते नजर आए।
बांध की सुरक्षा के लिए अधिकारियों ने 1100 मीटर लंबे नये रिंग बांध को बनाने का काम शुरू करवा दिया, जिसकी किसानों को भनक तक नही लगी। सोमवार को जब उन्हें इसकी जानकारी मिली, तब तक उनके कई खेत तालाब की शक्ल में तब्दील हो चुके थे।
इससे नाराज किसान नए रिंग बांध के निर्माण का विरोध करने लगे हैं। मंगलवार को कई किसान बांध मरम्मत के काम में लगी जेसीबी व ट्रैक्टर के आगे लेट गए। उनका कहना था कि अगर बांध का निर्माण करना है तो उन्हें ट्रैक्टर उनके ऊपर से ले जाना होगा।