शासन की ओर से किसान दुर्घटना बीमा योजना चलाई जा रही है। इसमें किसी भी किसान जिसके नाम भूमि दर्ज है, उसकी दुर्घटना में मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये बीमा की राशि देने का प्रावधान है। बीमे की रकम पांच लाख की प्रीमियम सरकार भरती है। किसान की दुर्घटना में मृत्यु पर मुख्य राजस्व अधिकारी द्वारा बीमे की राशि मृतक आश्रित के बैंक खाते में भेजी जाती है। जिले में 428 किसानों की मृत्यु दुर्घटनाओं में हो चुकी है।
इनके परिवारीजनों द्वारा बीमे की रकम के लिए आवेदन किया गया है। इसमें से 20 लोगों को ही बीमे का भुगतान मिल पाया है। 408 लोगों को अभी तक राशि नहीं मिल सकी है। विभागीय अधिकारी बजट की कमी बता रहे हैं।
मौत के कारण
किसी भी किसान की मौत आग लगने से, बिजली गिरने से, करंट लगने से, सांप काटने से, जीवजंतु काटने या मारने से, नदी, तालाब व पोखरों में डूबने से, मकान गिरने से, वाहन दुर्घटना, डकैती, दंगा, मारपीट व आतंकवाद की घटना से हुई हो।
भुगतान के दावे के नियम
दुर्घटना के कारण मृत्यु व शारीरिक क्षति की स्थिति देय राशि प्रतिशत राशि
मृत्यु व पूर्ण शारीरिक अक्षमता 100 प्रतिशत 5 लाख
दोनों हाथ, दोनों पैर, दोनों आंख की क्षति 100 प्रतिशत 5 लाख
एक हाथ या एक पैर या एक आंख की क्षति 50 प्रतिशत 2.5 लाख
स्थायी अपंगता (50 प्रतिशत से अधिक) 50 प्रतिशत 2.5 लाख
स्थायी अपंगता (25 प्रतिशत से अधिक) 25 प्रतिशत 1.25 लाख
क्या करें किसान के आश्रित
किसी कृषक की मृत्यु होने पर उस किसान के आश्रित की ओर से चार माह के भीतर बीमे की रकम के लिए दावा करना होता है। यह दावा उप जिलाधिकारी के यहां किया जाता है। अगर उक्त अवधि से अधिक समय बीत जाता है तो विलंब को क्षमा करने का अधिकार जिलाधिकारी से परमीशन लेनी होती है। आवेदन के समय आश्रित को मृत्यु प्रमाण पत्र, दुर्घटना का कारण, डॉक्टर की रिपोर्ट, बैंक पासबुक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, खतौनी की नकल देनी होती है।
सभी किसानों के आश्रितों की पत्रावलियों का अवलोकन व सत्यापन करा लिया गया है। इसके लिए शासन से बजट की मांग की गई है। बजट मिलने पर जिन आवेदकों की सारी कार्रवाई पूरी है, उन्हें भुगतान कर दिया जाएगा।
-त्रिलोकी सिंह, अपर जिलाधिकारी गोंडा