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चुनाव ने चौपट की विद्यालयों की पढ़ाई

Sat, 14 Nov 2015 10:59 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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अलग-अलग समय पर कराए गए पंचायत चुनाव से सरकारी स्कूलों की पठन-पाठन व्यवस्था चौपट हो गई है। पहली बार डीडीसी और बीडीसी का चुनाव हुआ तो अब ग्राम प्रधानी व पंचायत सदस्यों के चुनाव से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई चौपट होने की कगार पर है। आधे-अधूरे कोर्स के बीच ही वार्षिक परीक्षाओं को संपन्न कराने की तैयारी हो रही है।
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मतदाता सूची से लेकर मतगणना तक कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले मास्टर साहब बच्चों को पढ़ाने को मौका ही नहीं पाते तो कोर्स कैसे पूरा होगा।

करनैलगंज तहसील में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत का चुनाव ऐसे समय पर हुआ, जब स्कूलों में अर्धवार्षिक परीक्षाओं का आयोजन होना था।

परिषदीय विद्यालयों को ही मतदान केंद्र बनाया जाता है। एक व दो नवंबर को मतगणना के बाद कुछ विद्यालयों में आनन-फानन में परीक्षाएं अधूरे कोर्स के बीच ही निपटा ली गईं। व
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हीं, आधे से अधिक स्कूलों में परीक्षाएं सोमवार से प्रारंभ होनी हैं। एक बार फिर पंचायत चुनाव का दूसरा चरण प्रधान एवं ग्राम पंचायत सदस्य चुनाव का शुरू हो गया है।

इस चुनाव में परिषदीय, प्राथमिक व जूनियर स्कूलों के शिक्षकों को मतदाता सूची पुनरीक्षण से लेकर मतदान कराने व मतगणना कराने तक की ड्यूटी करनी पड़ रही है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता क्या होगी। इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

स्कूलों को मतदान केंद्र व बूथ बनाने से शिक्षा व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। ग्राम पंचायत, जिला पंचायत, विधान सभा, लोक सभा का चुनाव आते ही स्कूलों में व्यवस्था एवं शिक्षकों को चुनाव की ड्यूटी का चार्ट थमा दिया जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। -अनिल कुमार मिश्र, शिक्षक

जब तक शिक्षकों से पढ़ाने के अलावा अतिरिक्त कार्य, जनगणना, मकान गणना, पशु गणना, बाल गणना, मतदान एवं मतगणना का कार्य लिया जाएगा, तब तक प्राथमिक शिक्षा का स्तर बढ़ाना मुश्किल होगा। -अमरेंद्र सिंह, शिक्षक

कोई भी चुनाव हो, यदि गांव के विद्यालय को मतदान केंद्र बनाया जाता है तथा शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है तो शिक्षण कार्य करीब एक माह पीछे हो जाता है। चुनाव से शिक्षा विभाग को अलग रखना चाहिए। -नागेंद्रमणि तिवारी, शिक्षक

छमाही की परीक्षा अधूरे कोर्स के बीच ही कराई गई। अब वार्षिक परीक्षा की तैयारी हो या पंचायत चुनाव की। कभी छुट्टी तो कभी चुनाव ऐसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए कब समय निकाला जाए, यह विभाग को तय कर देना चाहिए।
-भरतराम नागवंशी, शिक्षक

केवल मतदान के दिन ही विद्यालय बंद किया गया था। इसके अलावा परिषदीय विद्यालयों की अर्धवार्षिक परीक्षाएं ज्यादातर स्कूलों में पूरी करा ली गई हैं। जिन ब्लॉकों का मतदान होता है, वहां के अध्यापकों की ड्यूटी चुनाव में नहीं लगाई जाती है। अर्धवार्षिक परीक्षाओं के लिहाज से जितना स्लेबस विद्यालय में पूरा होना चाहिए था, वह पूरा करा लिया गया है। -फतेहबहादुर सिंह, बीएसए गोंडा
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