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Gonda News: चिट्ठियां गईं लेकिन डाकिए की दस्तक नहीं

Thu, 08 Oct 2026 11:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। दोपहर की दस्तक सुनते ही कभी घर के लोग दरवाजे की ओर दौड़ पड़ते थे। कंधे पर थैला लटकाए डाकिया सामने खड़ा होता तो निगाह उसके हाथ में थमे लिफाफे पर टिक जाती थीं। परदेस गए किसी अपने की चिट्ठी है या नौकरी लगने की खबर, परीक्षा परिणाम आया है या किसी अपने का संदेश... डाकिए के हाथ का एक कागज पूरे परिवार के लिए खास होता था। समय बदला और मोबाइल-इंटरनेट ने चिट्ठियों की जगह ले ली लेकिन गांव की चौखट पर डाकिए की दस्तक आज भी जारी है।
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नौ अक्तूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है। समय के साथ डाकिए के थैले में चिट्ठियां भले ही कम हुई हों लेकिन लोगों की जरूरत की सेवाएं बढ़ी हैं। स्मार्टफोन और बायोमीट्रिक मशीन के साथ डाकिया गांवों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रहा है। बुजुर्ग घर बैठे पेंशन और अन्य भुगतान प्राप्त कर पा रहे हैं। बैंक शाखा से दूर रहने वाले ग्रामीणों को भी कई बैंकिंग सुविधाएं गांव में ही मिल रही हैं। डाक विभाग की सुकन्या समृद्धि योजना समेत बचत और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी ग्रामीणों तक पहुंचाई जा रही है।

483 शाखा डाकघरों का नेटवर्क
सहायक डाक अधीक्षक (मुख्यालय) सीपी पांडेय के अनुसार जिले में 483 शाखा डाकघर, 54 उप डाकघर और एक प्रधान डाकघर संचालित है। ग्रामीण क्षेत्रों के शाखा डाकघरों में करीब 470 पोस्टमैन और उप डाकघरों में 100 से 110 पोस्टमैन सेवाएं दे रहे हैं। यही नेटवर्क गांव-गांव तक डाक विभाग की सेवाएं पहुंचा रहा है।
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बदल गई डाकिए की भूमिका
डाकिए की जिम्मेदारी अब सिर्फ डाक बांटने तक सीमित नहीं है। पोस्टमैन घर जाकर पांच साल तक के बच्चों का आधार बना सकता है। डाक वितरण को गति देने के लिए बस स्टेशन के पास इंटीग्रेटेड डिलीवरी सेंटर से केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत फास्ट डिलीवरी सेवा दी जा रही है। छह से 15 अक्तूबर तक विश्व डाक दिवस के तहत जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
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