फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जोखिम भरा है जर्जर पुलों से राजधानी का सफर

विज्ञापन
विज्ञापन
गोंडा। देवीपाटन मंडल के चारों जिलों की लाखों आबादी के साथ ही पूर्वांचल के जिलों व नेपाल के लोगों को राजधानी से जोड़ने वाला बहराइच के घाघरा घाट पर बना संजय सेतु और करनैलगंज का सरयू पुल जर्जर हो गए हैं। आए दिन इन दोनों पुलों के पिलर में दरार आने से आवागमन प्रभावित रहता है।
विज्ञापन

दोनों पुल जर्जर होने के संबंध में कई बार शासन को रिपोर्ट भी भेजी जा चुकी है। मगर अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में इस रूट से राजधानी आवागमन करने वाले लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
करनैलगंज के सरयू पुल का निर्माण सन 1964 में और घाघरा घाट पर संजय सेतु का निर्माण 1984 में पूरा हुआ था। एक तो दोनों पुल काफी पुराने हो चुके हैं और लखनऊ से बहराइच और जरवलरोड से गोंडा तक की सड़क फोरलेन हो चुकी है। मगर दोनों पुल अभी तक टू-लेन ही हैं।
विज्ञापन

ऐसे में इन पुराने पुलों पर ट्रैफिक लोड काफी बढ़ गया है। इसके बाद भी पुल का निर्माण फोरलेन नहीं कराया गया, जबकि बाराबंकी में फोरलेन सड़क होने से टोल की वसूली भी हो रही है।
अब विधान परिषद सदस्य (गोंडा-बलरामपुर) अवधेश कुमार उर्फ मंजू सिंह ने दोनों पुलों का फोरलेन निर्माण कराने की मांग की है। जिसमें घाघरा घाट पुल के लिए तो केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आश्वासन भी दिया है। इससे लोगों को अब नए पुल के निर्माण का इंतजार है।
गोंडा से लखनऊ मार्ग पर करनैलगंज में सरयू नदी पर बना पुल 58 साल पुराना होने के कारण जर्जर हो गया है। इसके चलते ये आए दिन क्षतिग्रस्त होता है। इससे गोंडा व बलरामपुर की करीब 60 लाख की आबादी का राजधानी लखनऊ का सफर मुश्किल हो जाता है। बेहतरीन फोरलेन सड़क के बीच टू लेन के इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से लोगों को 40 किलोमीटर का चक्कर लगाकर आना-जाना पड़ता है।
वर्ष 2020 में सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रस्ताव पर तत्कालीन जिलाधिकारी नितिन बंसल व आयुक्त ने जर्जर पुल को क्षतिग्रस्त घोषित करने तथा नए फोरलेन पुल निर्माण के लिए सेतु निगम से प्रस्ताव भेजा था। शासन को 60 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन इस पर कोई अमल नहीं हुआ।
अब एक बार फिर एमएलसी अवधेश कुमार उर्फ मंजू सिंह ने इसके लिए शासन को पत्र लिखा है। जिसमें बताया कि वर्ष 1958 में करनैलगंज में सरयू नदी पर पुल का निर्माण शुरू कराया गया था। वर्ष 1964 में पुल बनकर तैयार हो गया था। करीब 16 साल पहले इस पुल की आयु पूरी हो गई।
इससे नए पुल निर्माण की मांग उठने लगी। तत्कालीन मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने सपा सरकार में पुल पर कर वसूली बंद कराई थी। बीते चार साल में ये पुल चार बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। कभी पुल में दरार आ जाती है तो कभी बीम के बीच की दूरी बढ़ जाती है। बीते वर्ष भी पुल में दरार आ गई थी।
सेतु निगम के मुख्य परियोजना प्रबंधक ने सरयू नदी पर किलोमीटर 221 पर पुराने जर्जर दो लेन पुल को क्षतिग्रस्त घोषित करने तथा उसके स्थान पर अप एवं डाउन स्ट्रीम पर दो-दो लेन के पुल निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार किया।
प्रारंभिक आगणन 5968.31 लाख का तैयार करके जुलाई 2020 में तत्कालीन जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा गया। मगर इस प्रस्ताव पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। ऐसे में गोंडा, बलरामपुर, डुमरियागंज व सिद्धार्थनगर के लोगों का राजधानी लखनऊ आना-जाना मुश्किल होता है।
देवीपाटन मंडल के जिलों के साथ-साथ पूर्वांचल के कई जिलों को संजय सेतु सीधे लखनऊ से जोड़ता है। इस पुल के बिना मंडल के किसी भी जिले से सड़क मार्ग द्वारा लखनऊ आवागमन नहीं हो सकता है। लखनऊ-बाराबंकी-बहराइच-रूपईडीहा से नेपाल को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 927 भी संजय सेतु से होकर ही गुजरता है।
तकरीबन 900 मीटर लंबे इस पुल का शिलान्यास नौ अप्रैल 1981 को तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने किया था। वर्ष 1984 में इसे आम लोगों के लिए शुरू कर दिया गया। पुल में तकनीकी गड़बड़ी समय-समय पर आती रही।
दो साल से पुल में आए दिन कोई न कोई खराबी होने से आवागमन बाधित रहता है। ये पुल देवीपाटन मंडल की व्यवसायिक गतिविधियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। व्यापारी आदित्यपाल कहते हैं कि ये पुल व्यापार की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में पुल का निर्माण फोरलेन होना चाहिए।
विधान परिषद सदस्य अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह ने बताया कि सरयू पुल के लिए राज्य सरकार से तथा घाघरा घाट पर फोरलेन पुल के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री से मांग की गई है। केंद्रीय मंत्री ने पत्र पर जवाब भेजा है कि घाघरा घाट पर फोरलेन पुल के निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही सरयू पुल को भी फोरलेन बनाने के लिए शासन में प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें