गोंडा। नवाबगंज कस्बे से 16 जुलाई की सुबह हुए शिक्षिका के अपहरण के मामले में पुलिस अभी तक खाली हाथ है। न तो शिक्षिका का कुछ पता चल सका और न ही आरोपी प्रशांत सिंह का कोई सुराग लग सका। इससे आक्रोशित कस्बे के व्यापारियों ने रविवार को दुकानें बंद रखीं। वहीं, पुलिस ने आरोपी जिम संचालक प्रशांत सिंह के दो सहयोगियों को गिरफ्तार करने के साथ ही वारदात में प्रयुक्त एसयूवी अयोध्या से बरामद की है। प्रशांत के दोनों सहयोगियों को जेल भेजा गया है।
कस्बा नवाबगंज के एक मोहल्ले की रहने वाली युवती होलापुर गांव के निजी स्कूल में शिक्षिका है। शनिवार सुबह अन्य शिक्षिकाओं संग स्कूल जाते समय कस्बे के कटी तिराहे के पास हाईवे पर स्कॉर्पियो सवार प्रशांत सिंह ने ई-रिक्शा रुकवाकर उसका अपहरण कर लिया था। मामले में शिक्षिका की मां ने थाना नवाबगंज में जिम संचालक प्रशांत सिंह के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस टीमों ने आरोपी की तलाश में तमाम जगह दबिश दी मगर सफलता नहीं मिली। पुलिस की दो टीमें गुरुग्राम भी भेजी गईं, जहां प्रशांत की बहन रहती है। मगर वहां से भी पुलिस को निराश लौटना पड़ा। शिकंजा कसने के लिए पुलिस ने प्रशांत के जिम पर ताला जड़ने के साथ ही उसके तीन बैंक खाते फ्रीज करा दिए। मगर न तो अपहृत शिक्षिका का कुछ पता चला और न ही प्रशांत ही पुलिस के हत्थे चढ़ा।
मामले में नवाबगंज पुलिस की लचर कार्यशैली को लेकर परिजनों के साथ ही कस्बे के व्यापारियों में जबर्दस्त आक्रोश है। रविवार को कस्बे में व्यापारियों ने दुकानें बंद रखकर विरोध जताया। सुबह कस्बे की सभी दुकानें बंद रहीं। इस दौरान कस्बा चौकी प्रभारी महेंद्र प्रताप सिंह पुलिस फोर्स के साथ घूम-घूमकर लोगों से दुकानें खोलने की अपील करते रहे। पुलिस के आश्वासन पर दोपहर बाद तमाम व्यापारियों ने दुकानें खोल लीं।
नवाबगंज इंस्पेक्टर तेज प्रताप सिंह ने बताया कि शिक्षिका के अपहरण के मामले में लोलपुर फोरलेन हाईवे से शनिवार को प्रशांत के दो साथियों को गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए विजय शंकर पांडेय उर्फ गोलू और पवन दुबे की निशानदेही पर अपहरण में प्रयुक्त एसयूवी अयोध्या से बरामद कर ली गई है।
इंस्पेक्टर ने बताया कि विजय शंकर पांडेय उर्फ गोलू निवासी मंहगूपुर और पवन दुबे निवासी बेगमपुरा, कोतवाली अयोध्या वारदात के वक्त प्रशांत के साथ एसयूवी में थे। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है। इंस्पेक्टर का कहना है कि जल्द ही मुख्य आरोपी प्रशांत सिंह को गिरफ्तार करके शिक्षिका को सकुशल बरामद कर लिया जाएगा।
वहीं, अपहृत शिक्षिका के पिता ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने अपहरण की सूचना पर तत्काल कार्रवाई नहीं की। अगर पुलिस तेजी दिखाती तो शायद अब तक बेटी मिल जाती और आरोपी प्रशांत सलाखों के पीछे होता। उनका कहना है कि पुलिस को वारदात के एक सप्ताह बाद अयोध्या से आरोपी की एसयूवी बरामद करने में ही सफलता मिल सकी। वारदात में शामिल दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस उनसे प्रशांत के बारे में कोई जानकारी नहीं जुटा सकी। वहीं, अपहृत शिक्षिका की मां जिले के उच्चाधिकारियों के साथ ही मुख्यमंत्री तक को पत्र भेजकर गुहार लगा चुकी हैं।