जिले के कृषि विभाग के कर्मचारियों के प्रमोशन का मुद्दा अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। प्रदेश के कृषि निदेशक के आदेश के दो साल बाद भी विभाग के करीब छह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का प्रमोशन नहीं हो सका। जिले के संयुक्त कृषि निदेशक को प्रदेश के कृषि निदेशक ने दो साल पहले आदेश जारी किया था कि अपने कार्यालय में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति कर शासन को रिपोर्ट भेजें। लेकिन यहां कृषि निदेशक का आदेश बौना साबित हुआ। अब मायूस कर्मचारियों ने अपने हक के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
जिले में संयुक्त कृषि निदेशक कार्यालय के अलग-अलग अनुभाग में चतुर्थ श्रेणी के छह कर्मचारी काफी समय से तैनात हैं। बताया जाता है कि इन कर्मचारियों का चार साल पहले जो योग्य हैं, उनका प्रमोशन लिपिक के पद पर हो जाना चाहिए।
इस बाबत शासन की ओर से आदेश भी जारी किया जा चुका है, लेकिन नियम को ताक पर रख कर अधिकारियों ने कर्मचारियों का प्रमोशन नहीं किया।
इस मामले में दो साल पहले प्रदेश के कृषि निदेशक ने प्रकरण को संज्ञान में लेकर देवीपाटन मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक को आदेश जारी किया कि विभाग के पात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का प्रमोशन कर दिया जाए, लेकिन यह आदेश विभाग के कार्यालय में दब कर रह गया।
अभी तक प्रमोशन न होने से इन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में आक्रोश है। अब इनमें से कुछ कर्मचारियों ने रिट दाखिल कर प्रमोशन करने की मांग की है।
इस संबंध में देवीपाटन मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक आरसी शुक्ल का कहना है कि विभाग के कुछ चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का प्रमोशन किया जाना है।
इस मामले में कृषि निदेशालय से भी निर्देेश जारी किया गया है। इसमें कुछ दुविधाएं हैं, जिन्हें दूर करने के बाद प्रमोशन की कार्रवाई की जाएगी।