गोंडा। खोड़ारे थाने की पुलिस का एक कारनामा उजागर हुआ है। यहां आईजीआरएस प्रार्थना पत्र निस्तारित करने के लिए हेड कांस्टेबल ने दो गवाहों का बयान दर्ज कर लिया। इनमें से एक गवाह की दो साल पहले ही मृत्यु हो चुकी है। पीड़ित ने शुक्रवार को डीआईजी से शिकायत मिलकर शिकायत की। डीआईजी ने मामले में जांच के निर्देश दिए हैं।
मामला खोड़ारे थाना क्षेत्र के नरहरपुर सोमई गांव से जुड़ा है। यहां के निवासी मोहम्मद अकरम ने देवीपाटन परिक्षेत्र के डीआईजी अमरेंद्र प्रसाद सिंह को दिए गए शिकायती पत्र में कहा कि वह नरहरपुर गांव के पूर्व प्रधान हैं। अपनी निजी भूमि में ग्राम पंचायत के धन से ग्रामवासियों को आने-जाने के लिए खड़ंजा लगवाया था। खड़ंजे के दोनों तरफ दो-दो फुट जमीन छूटी थी। जिस पर पट्टीदार मो. असलम रास्ता रोकने के उद्देश्य से आरसीसी पिलर लगा रहे थे। मना करने पर विगत 11 जून को मो. असलम, अशरफ, अतहर व अरशद ने मिलकर उसके पुत्र अफसर को पीट दिया। पीड़ित ने थाने पर तहरीर दी मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उपनिरीक्षक रामधारी दिनकर के सामने भी विपक्षी मारपीट पर आमादा हो गए।
अकरम ने बताया कि उन्होंने आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी। जांच थाने के हेड कांस्टेबल दयानंद चौरसिया को मिली। जिन्होंने मौके पर जाए बिना ही निस्तारण कर दिया। इसमें गांव के दो गवाहों का नाम लिखकर गवाही भी दर्ज कर दी। जिसमें से प्रथम गवाह यार मोहम्मद की दो वर्ष पहले ही मृत्यु हो चुकी है। डीआईजी ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
हेड कांस्टेबल दयानंद चौरसिया का कहना है कि जांच के लिए वह मौके पर गए थे। ग्राम प्रधान ने ये दोनों नाम बताए थे। दूसरी तरफ प्रभारी निरीक्षक विद्यासागर पांडेय ने बताया कि वह स्वयं मौके पर जाकर प्रकरण की जांच करेंगे। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।