सरकार अब तालाब निर्माण को अनुदान देगी। ये तालाब जल प्लावित क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीनों पर बनेंगे। इनका इस्तेमाल मछली पालन के रूप में होगा। इससे किसानों की जल प्लावित जमीन का सदपयोग भी हो सकेगा। साथ ही किसानों की आय में भी इजाफा होगा।
भौगोलिक कारणों से तमाम इलाके जल प्लावित क्षेत्र में आते हैं। इसमें किसानों की काफी जमीन कभी-कभी एक फसली बनकर ही रह जाती है। शासन ने इस क्षेत्र में मछली पालन से किसानों के आय में इजाफा करने के उददेश्य से मछली पालन को तालाब निर्माण योजना शुरू की है।
इस बार शासन स्तर से जिले को नौ हेक्टेअर में तालाब निर्माण का लक्ष्य मिला है। जिला मत्स्य पालन विकास अभिकरण किसानों का चयन करेगा। योजना से किसान अपने जल प्लावित क्षेत्र वाले खेत में तालाब का निर्माण करवा सकते हैं। इसमें तालाब निर्माण में किसानों को बैंक से लिए लोन की अदाएगी में जहां अनुदान मिलेगा।
किसान जिनके खेत जल प्लावित क्षेत्र में है और वे अपने जमीन में तालाब निर्माण कराने के इच्छुक हैं। उन्हें जिला मत्स्य पालन विकास अभिकरण कार्यालय में आवेदन करना होगा। विभाग की समिति किसान का चयन करेगी। इसके बाद समिति किसान की एक प्रोजेक्ट फाइल तैयार कर तालाब की आने वाली लागत के मुताबिक लोन के बैंक को संस्तुति फाइल भेज दी जाएगी।
-शासन की ओर से जल प्लावित क्षेत्र में तालाब बनाने की योजना चलाई जा रही है। जिन किसानों को मत्स्य पालन कराना हो, वह विभाग में आवेदन कर सकते हैं। तालाब निर्माण की लागत का 80 फीसद अनुदान दिया जाएगा। मछली पालन से किसानों की आय में बढ़ोत्तरी हो सकती है। - संजय कुमार , जिला कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालन विकास अभिकरण गोंडा।