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ढहाए गए 200 स्कूलों में कईयों की भूमि पर दंबगों की नजर

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गोंडा। जिले में जर्जर हो चुके दो सौ से अधिक स्कूलों को अभियान चलाकर ढहाया गया है। अब उनके स्थान पर नए भवन का निर्माण होना है। इसके लिए कार्रवाई ब्लाकों में हो रही है। इसी बीच ढहाए गए स्कूलों से खाली हुई भूमि पर गांव के दबंगों की नजर टिक गई है।
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ऐसे ही एक मामले का खुलासा हुआ। तरबगंज के एक स्कूल की भूमि का बंटरबांट करने की शिकायतें सामने आई हैं। इधर, बीएसए की ओर से 17 दिन में दो बार आदेश जारी कराना चौंकाने वाला है। फिलहाल अधिकारियों की निगाहें विभाग की कारस्तानी पर टिक गई है और जांच की तैयारी हो रही है।
स्कूलों के जर्जर होने से बच्चों की जानमाल को खतरा था। दो चरणों में दो सौ से अधिक पुराने स्कूल भवनों की नीलामी हो चुकी है और उन्हें ढहाया भी जा चुका है। महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने जर्जर स्कूलों को ढहाने के आदेश में स्पष्ट किया था कि नया भवन वहीं बनाया जाए, जहां पहले से बना था।
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लेकिन कई स्कूलों के निर्माण में इस निर्देश की अनदेखी किए जाने का मामला सामने आया है। तरबगंज के प्राइमरी स्कूल काशीपुर का मामला चर्चा में है। यहां पर गांव के पास ही प्राइमरी स्कूल का निर्माण 1965 में हुआ था। जर्जर होने पर स्कूल को ढहा दिया।
नए स्कूल का निर्माण कराने के लिए उसी स्थान पर 12 जून को बीएसए ने आदेश किया। इसके साथ ही गांव के बाहर स्थित स्कूल की भूमि को सुरक्षित करने का आदेश दिया था।
इसके बाद 29 जून को बीएसए अपने ही आदेश पलटते हुए दिखे और उन्होने पुराने स्कूल भवन की भूमि पर नए निर्माण के बजाए गांव के बाहर स्थित भूमि पर निर्माण के आदेश दे दिए। स्कूल के शिक्षक दूसरे स्थान पर ही निर्माण कराने की तैयारी कर रहे हैं। वहां के प्रधानाध्यापक विनोद कुमार सिंह कहते हैं कि उन्हें बीएसए के आदेश पर ही निर्माण कराना है।
प्राइमरी स्कूल काशीपुर का निर्माण 1965 में राजस्व अभिलेखों में आबादी दर्ज भूमि पर बना था। गांवों में ज्यादातर सरकारी संस्थान पूर्व में आबादी की भूमि पर बनाए गए थे। गांव के पास स्कूल होने से बच्चों की सुविधा थी। बाद में चकबंदी में गांव से बाहर प्राइमरी स्कूल के नाम भूमि आरक्षित कर दी गई।
माना जा रहा है कि स्कूल के नाम आरक्षित भूमि को कटीलेतारों से घेर कर किचन गार्डेन विकसित करने की योजना थी। क्षेत्रीय विधायक की ओर से एक पत्र पर खंड शिक्षाधिकारी ने बीएसए को रिपोर्ट भी और दोबार बीएसए ने निर्माण के लिए स्थान परिवर्तन कर दिया।
काशीपुर के अरूण सिंह, बलराज सिंह ने डीएम को भेजे शिकायती पत्र में कहा कि स्कूल दूसरी जगह पर बनने से यहां की भूमि खाली हो जाएगी। स्कूल के शिक्षक ने मिलीभगत कर रखी है, और लोग कब्जा करने के ताक में हैं।
जिले में स्कूल की भूमि पर कब्जे का मामला पहले भी सामने आ चुका है। साल 2018 में नवाबगंज के विश्वनोहरपुर में प्राइमरी स्कूल को ढहाकर भूमि कब्जा किए जाने का मामला शासन तक गूंजा था। स्कूल के प्रधानाध्यापक व बीईओ समेत कईयों पर कार्रवाई भी हो चुकी है।
इसके बाद सावधानी बरतने का आदेश भी दिया जा चुका है। फिर भी अधिकारी मनमाने ढंग से आदेश जारी कर रहे हैं। यही नही निर्माण के लिए स्थान परिवर्तन सिर्फ एक पत्र के आधार पर दिया गया है किसी उच्चाधिकारी से अनुमति भी नही ली गई है।
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