गोंडा। जिले के परिषदीय विद्यालयों में सामूहिक प्रयास से नामांकन बढ़ाने के निर्देश जारी कर दिए गए। मगर विभाग एआरपी व स्टेट रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी) के चयन प्रक्रिया में ही उलझा हुआ है। एआरपी चयन के लिए फिर से आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई। साथ ही उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें मूल विद्यालय भेज दिया गया है। जबकि एसआरजी का भी कार्यकाल खत्म हो चुका है। इसके बावजूद चयन प्रक्रिया को लेकर कोई कवायद नहीं दिख रही है।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई शिक्षा नीति के तहत सभी ब्लॉकों में पांच अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों को एकेडमिक रिसोर्स पर्सन की जिम्मेदारी दी गई थी। इन्हें रोजाना ब्लॉकों के विद्यालयों में जाकर शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए योजना तैयार करनी थी। साथ ही शैक्षणिक कार्यों में सुधार के लिए शिक्षकों को भी बेहतर करने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
मगर, बीते 31 मार्च को जिले में तैनात सभी 65 एआरपी को कार्यकाल पूरा होने के बाद बीएसए अतुल कुमार तिवारी ने मूल विद्यालय भेज दिया। सभी ने अपने मूल विद्यालय में पदभार ग्रहण कर लिया है। जिले में एआरपी की चयन प्रक्रिया लेटलतीफी की पर्याय बनती जा रही है। विभाग की ओर से परीक्षा की तिथि निर्धारित करने के बजाय एक बार फिर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) हरिगोविंद यादव ने बताया कि एआरपी की सेवा देने के इच्छुक शिक्षक सात अप्रैल तक आवेदन कर सकेंगे। पंजीकृत डाक के माध्यम से मिलने वाले आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पहले चरण में कुल 85 एआरपी पदों के सापेक्ष कुल मिलाकर 137 आवेदन आए हैं। आवेदक शिक्षकों को लिखित परीक्षा, माइक्रो टीचिंग और साक्षात्कार की प्रक्रिया से गुजरना होता है। आवेदकों की संख्या कम देखते हुए आवेदन की तिथि बढ़ाई गई है। परियोजना कार्यालय की ओर से 10 अप्रैल तक चयन प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बीएसए अतुल कुमार तिवारी ने बताया कि पिछली बार भी सबसे अधिक 65 हजार नामांकन हुआ था। 50 हजार फर्जी नामांकन पाया गया था। इस बार भी प्रयास किए जा रहे हैं। एआरपी को मूल विद्यालय भेजा गया है। जबकि परियोजना कार्यालय से बात करके एसआरजी को कार्यमुक्त किया जाएगा। जल्द ही नए सिरे से एआरपी व एसआरजी की चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
एसआरजी का भी खत्म हो चुका है कार्यकाल
बीते 31 मार्च को एसआरजी का भी कार्यकाल पूरा हो चुका है। जिले में तीन शिक्षकों की एसआरजी के पद पर तैनाती है। ये जिला व परियोजना कार्यालय के साथ ही एआरपी व शिक्षकों के बीच कड़ी के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। मगर परियोजना कार्यालय से 31 मार्च को मूल विद्यालय भेजने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अभी तक नहीं हटाया गया है। ऐसे में एसआरजी भी अपनी सेवाओं को लेकर असमंजस में हैं।
निजी विद्यालय संचालकों की बढ़ती जा रही मनमानी
जिले का बेसिक शिक्षा विभाग जहां चयन प्रक्रिया में ही उलझा है। वहीं, जिले में स्कूल चलो अभियान के तहत नामांकन बढ़ाना बड़ी चुनौती है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले शैक्षणिक सत्र में 50 हजार बच्चे कम हुए थे। जबकि मौजूदा सत्र में भी विभाग ढुलमुल रवैया ही अख्तियार कर रहा है। ऐसे में निजी विद्यालय संचालक अपने दावे के जरिए बच्चों को प्रवेश दे रहे हैं। जबकि इन विद्यालयों में मानक के अनुसार सुविधाएं तक नहीं हैं।