करनैलगंज में रामलीला का मंचन करते कलाकार। - संवाद
करनैलगंज। नगर में चल रहे श्रीरामलीला महोत्सव में सोमवार रात राजा भानु प्रताप की लीला ने दर्शकों का मन मोह लिया। लीला में दिखाया गया कि किस प्रकार सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने वाले राजा भानु प्रताप को एक षड्यंत्र के चलते ब्राह्मणों के श्राप का सामना करना पड़ा।
लीला की शुरुआत में महाराज सत्यकेतु अपने ज्येष्ठ पुत्र वीर भानु प्रताप को राजगद्दी सौंपकर वनवास को प्रस्थान करते हैं। गद्दी संभालने के साथ ही भानु प्रताप अत्याचार और अधर्म के खिलाफ अभियान छेड़ते हैं। सेनापति व छोटे भाई अरिमर्दन के साथ मिलकर कई अधर्मी राजाओं को पराजित कर राज्य की सीमाएं विस्तारित करते हैं। इसके बाद लीला में एक रोचक मोड़ तब आता है जब राजा भानु प्रताप ब्राह्मणों के लिए भव्य भंडारे का आयोजन करते हैं, लेकिन, विदूषक और उसका मंत्री ब्राह्मण वेश में आकर भोजन में मांस मिला देते हैं। जैसे ही ब्राह्मण भोजन करने बैठते हैं, आकाशवाणी होती है कि भोजन अशुद्ध है। यह सुनते ही क्रोधित ब्राह्मण राजा को श्राप दे देते हैं। बाद में सत्य सामने आता है कि राजा निर्दोष हैं। पश्चाताप करते हुए ब्राह्मण उन्हें श्राप से मुक्ति का उपाय बताते हैं।
लीला में यह भी दिखाया गया कि श्राप के प्रभाव से राजा भानु प्रताप त्रेतायुग में रावण, अरिमर्दन कुंभकरण और सेनापति विभीषण के रूप में जन्म लेते हैं। लीला में वीर भानु प्रताप की भूमिका आशीष गिरि, अरिमर्दन की अभिषेक पुरवार, सेनापति की अनुज जायसवाल, मंत्री की सचिन गुप्ता और विदूषक की कन्हैयालाल वर्मा ने निभाई। अन्य कलाकारों ने भी शानदार अभिनय किया। इस अवसर पर मोहित पांडेय, सोनू पुरवार, प्रेमचंद सोनी, अरमान पुरवार, अंकित जायसवाल, मानस सोनी, रितेश सोनी, विश्वनाथ शाह, मनीष भट्ट, आदर्श पटवा, गणेश वैश्य, आभास सोनी, अमन सोनी उपस्थित रहे।