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बरसात से बांध को खतरा

Mon, 06 Jul 2015 11:05 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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एल्गिन-चरसडी बांध की मरम्मत और बांध को कटान से रोकने की कवायद रामभरोसे चल रही है। बांध के लिए किसी भी वक्त बरसात शामत बन सकती है। इसके लिए किसी भी प्रकार के ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। वहीं रविवार की रात हुई बारिश से घाघरा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंकाएं भी तेज होने लगी हैं। साथ ही बांध व नदी के बीच की दूरी भी दिनोंदिन नदी के कटान करने से घटती जा रही है।
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घाघरा का जलस्तर भले ही स्थिर हो, मगर बांध की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। बस इंतजार है तो जलस्तर बढ़ने का। एक तरफ  एल्गिन-चरसड़ी बांध से लोगों का विश्वास उठ चुका है, तो वहीं प्रशासन एल्गिन-चरसड़ी बांध के विकल्प के तौर पर लोगों को दूसरे रिंग बांध के निर्माण का आश्वासन देकर उन्हें जैसे-तैसे मनाने में लगा है।

संवेदनशील हो चुके बांध से दो सौ मीटर दूर रिंग बांध बांधने का कार्य रविवार से शुरू हो गया था, लेकिन रात में शुरू हुई बारिश से काम काफी देर तक प्रभावित रहा। हालांकि सोमवार को दिन में बूंदाबांदी के बीच इसका काम युद्ध स्तर पर फिर से चालू हो गया, लेकिन इन सबसे हटकर घाघरा का पानी अभी भी एल्गिन-चरसड़ी बांध की कटान कर रहा है।
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बांध व नदी के बीच जो 600 बीघा भूमि अभी तक खाली पड़ी थी, उसे भी घाघरा के पानी ने आगोश में ले लिया है। जहां कल तक घास जमी दिखाई देती थी, वहां आज घाघरा का पानी बह रहा है। इससे क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ी हुई हैं। लोगों का कहना है कि रविवार की रात जो बारिश हुई है, उससे किसी भी समय नदी का जलस्तर बढ़ सकता है। साथ ही बनबसा बैराज से पानी छोड़े जाने को लेकर भी लोग संशय में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर नदी का जलस्तर बढ़ता है तो इससे बांध के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।

पुराने बांध पर संवेदनशील एरिया में बांध को पांच मीटर चौड़ा कराया जा रहा है। बांध से दो सौ मीटर दूर एक हजार से ग्यारह सौ मीटर लंबा रिंग बांध बनाने का काम भी युद्ध स्तर पर चल रहा है। - वीके सिंह, एसडीएम करनैलगंज

बांध की मरम्मत व निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। नदी का जलस्तर स्थिर है। सोमवार को नदी में 84 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ। बांध व नदी के बीच की भूमि कटकर नदी में समा चुकी है, जिससे नदी अब बांध से सटकर बह रही है। - अशोक कुमार, एई, बाढ़ कार्य खंड
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