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रिश्वत लेने का आडियो लीक होने पर न्यायालय ने मांगा जवाब

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तरबगंज (गोंडा)। राजस्व निरीक्षक द्वारा रिश्वत लेना स्वीकार किए जाने का ऑडियो लीक होने के बाद भी तरबगंज तहसील प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर लीपापोती कर दी। घटना के 6 माह बीतने के बाद भी कार्रवाई ना होने पर पीड़ित की अपील पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को इस मामले में दो सप्ताह के अंदर सरकार से पूर्ण निर्देश प्राप्त कर कोर्ट को अवगत कराने का आदेश दिया है।
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यह आदेश जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी और जस्टिस आलोक माथुर की बेंच ने तुलसीपुर ग्राम निवासी शिव नारायन यादव की एक याचिका पर दिया है। याचीपक्ष के अधिवक्ता चंदन श्रीवास्तव ने बताया कि जनवरी 2018 में तरबगंज तहसील के ग्राम तुलसीपुर माझा के एक गाटा की पैमाइश के दौरान तत्कालीन कानूनगो कृष्ण बिहारी पांडेय द्वारा किसानों से अवैध वसूली करने का आरोप है।
इस मामले में दो-दो बार जांच हुई व जांच रिपोर्ट में तत्कालीन कानूनगो पर लगे आरोप सही पाए गए। जांच अधिकारी द्वारा 18 अप्रैल 2018 व 7 सितंबर 2018 को एसडीएम को रिपोर्ट भेजते हुए, कार्रवाई की संस्तुति भी कर दी गई। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दी। वहीं दागी कानूनगो सेवानिवृत्त भी हो गया जिसके बाद एक शिकायतकर्ता शिव नारायण यादव ने हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल कर जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का आदेश देने की मांग की।
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याची के अधिवक्ता की दलील थी कि उत्तर प्रदेश राज्य बनाम ब्रह्मदत्त शर्मा मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी के विभागीय कार्रवाई से बचने का आधार नहीं हो सकता। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई के उपरांत दो सप्ताह में जवाब मांगा है। वहीं इस संबंध में एसडीएम राजेश कुमार ने बताया कि न्यायालय के आदेश का पालन कराया जाएगा।
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