गोंडा। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल जन आरोग्य मेले में इलाज की जमीनी हकीकत दावे से इतर है। विगत 21 मार्च को जिले के दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग से जन आरोग्य मेले की प्रगति पूछी तो उन्हें ‘ऑल इज वेल’ दिखा दिया गया। मगर रविवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से 52 पीएचसी पर आयोजित जन आरोग्य मेले में अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा।
वीरपुर निवासी रीना देवी को कई दिन से बुुखार व जुकाम की समस्या थी। पीएचसी माधवपुर में जन आरोग्य मेला में इलाज कराने पहुंची तो डॉक्टर ने कहा कि पहले बाहर से जांच कराकर आओ, तभी दवाएं काम करेंगी। इसी गांव के रिंकू को पेट में दर्द था। मेले में इनको भी बाहर से जांच कराने की सलाह दी गई। हरखापुर निवासी पुष्पा ने बताया कि पीठ में काफी दिनों ने दर्द है। इन्हें भी बाहर से एक्सरे कराने की सलाह दी गई। प्रभारी डॉ. कृतिका प्रसाद ने बताया कि जनवरी माह से मेले में कोई होम्योपैथिक व आरबीएसके का डॉक्टर नहीं आया। पीएचसी में किसी प्रकार की जांच की व्यवस्था नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विमलेश पांडेय ने बताया कि 18 मरीजों ने पंजीकरण कराया था, जिसमें पांच लोग बिना इलाज कराए ही लौट गए।
छपिया सीएचसी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मसकनवा में रविवार दोपहर तक सिर्फ दो मरीज ही पहुंचे। इनके नाम केशव प्रसाद व बीना कुमारी है। दोनों को खांसी आ रही थी। डॉक्टर ने दवा देकर घर भेज दिया। मेले में डॉ. अंकुर सिंह यादव, फार्मासिस्ट रमेश यादव, एलटी विजय प्रताप, सत्येंद्र तिवारी, अनीता देवी, अनूप कुमार, शशि कुमार आदि मौजूद रहे।
वजीरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डुमरियाडीह पीएचसी पर कुल 33 मरीजों का पंजीकरण हुआ। जिसमें तीन गर्भवती महिलाओं की जांच हुई। चार लोगों काे टीबी की आशंका को देखते हुए सैंपल लिया गया। इस दौरान चिकित्साधिकारी डॉ. केके सिंह, फार्मासिस्ट अनुराग सिंह, एलटी अंजनी मिश्र, एएनएम राधा त्रिपाठी, स्टाफ नर्स अर्चना तिवारी, संदीप कुमार व एसआर कुलदीप आदि मौजूद रहे।
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में एक ही छत के नीचे जांच व इलाज की व्यवस्था मुहैया कराई जा रही है। तहसीलों के नोडल अधिकारी मेले का निरीक्षण कर रहे हैं। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।