गोंडा। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निरीक्षण के बाद भी जिला अस्पताल के हालात सुधर नहीं रहे हैं। जहां डॉक्टरों की कमी से मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है, वहीं स्वास्थ्यकर्मियों की मनमानी से तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में मरीजों के तीमारदारों को खुद स्ट्रेचर खींचना पड़ता है। वहीं, स्ट्रेचर भी न मिलने पर तीमारदार मरीजों को पीठ पर लादकर घूमते नजर आते हैं। तीमारदारों की दशा पर न तो अस्पताल प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही वार्ड ब्वाय। सोमवार को भी जिला अस्पताल में इसी तरह का नजारा सामने आया। पेश है रिपोर्ट :
शहर के पोर्टरगंज निवासी ननकऊ मिश्र को जिला अस्पताल के पुरुष सर्जिकल वार्ड में भर्ती कराया गया है। आर्थो सर्जन ने एक्सरे कराने के लिए कहा। अस्पताल के पीछे कोविड बिल्डिंग में एक्सरे कराने जाना था मगर ननकऊ के छोटे भाई को स्ट्रेचर नहीं मिला। इस पर वह उन्हें पीठ पर लादकर एक्सरे कराने के लिए निकल पड़ा। तीमारदार ने बताया कि काफी देर इंतजार करने पर भी स्ट्रेचर नहीं मिला। इस वजह से बड़े भाई को पीठ पर लादकर ले जाना पड़ा। वहीं, महिला वार्ड में भर्ती एक मरीज को क्षेत्रीय निदान केंद्र में जांच करानी थी। वार्ड ब्वाय नहीं मिलने पर तीमारदार ही मरीज का स्ट्रेचर खींचते नजर आए।
जिला अस्पताल के लैब में दो महीने से थायराइड की जांच नहीं हो पा रही है। इससे मरीजों को बाहर से महंगी जांच करानी पड़ रही है। बाहर पैथालॉजी में थायराइड की प्रत्येक जांच 400 से 450 रुपये तक होती है। थायराइड की कुल तीन जांच करानी पड़ रही है। सोमवार को जानकी नगर की सुधा को थायराइड जांच करानी थी, अस्पताल में जांच न होने के कारण उन्हें बाहर से 400 रुपये में जांच करानी पड़ी। वहीं, महिला वार्ड में भर्ती प्रभावती को भी बाहर से 450 रुपये की जांच करानी पड़ी।
जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. इंदुबाला का कहना है कि कुछ दिनों से जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है, इससे कुछ परेशानी जरूर हो रही है। मगर स्ट्रेचर व कर्मचारी पर्याप्त हैं। मरीज कर्मचारियों को बिना बताए ही खुद स्ट्रेचर खींचकर जाने लगते हैं। वहीं, थायराइड जांच के लिए रीजेंट मंगाए जा रहे हैं।