गोंडा। विधि व्यवस्थाओं को दरकिनार करने के मामले में उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। प्रथम क्रेता की ओर से दाखिल अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान तहसीलदार की कार्यवाही पर असंतोष जताते हुए शुक्रवार को सुनवाई की तिथि निश्चित कर अदालत ने तहसीलदार न्यायिक को पत्रावली के साथ दोपहर ढाई बजे व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम लोहसीसा निवासी श्यामा देवी व श्रीमती देवी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में अवमानना वाद दाखिल किया। जिसमें कहा कि उन्होंने गांव के धर्मराज से कृषि भूमि क्रय की थी। 17 अक्तूबर 2013 को बैनामा दस्तावेज का निष्पादन कराया था, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी। इसके बाद उपनिबंधक कार्यालय में 16 नवंबर 2013 को रजिस्ट्री हुई। इस बीच 19 अक्तूबर 2013 को विक्रेता धर्मराज ने उसी जमीन का गांव की बिंदू यादव और रामकुमार के नाम बैनामा कर दिया। याची ने नामांतरण प्रक्रिया के दौरान द्वितीय बैनामेदारों के पक्ष में नामांतरण पर आपत्ति की।
याची के अधिवक्ता ने लिखित बहस में उच्चतम व उच्च न्यायालय द्वारा कई मामलों में पारित विधि व्यवस्था का हवाला भी दिया, लेकिन तहसीलदार न्यायिक मनीष कुमार ने उच्च व सर्वोच्च न्यायालय की विधि व्यवस्थाओं को दरकिनार करते हुए दो जून 2025 को द्वितीय बैनामादारों के पक्ष में नामांतरण का आदेश कर दिया। तहसीलदार ने अपने आदेश में अधिवक्ता द्वारा दी गई उच्च व सर्वोच्च न्यायालय की विधि व्यवस्थाओं का जिक्र नहीं किया। अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने एक अगस्त 2025 को सुनवाई की तिथि निश्चित की है। कोर्ट ने तहसीलदार न्यायिक मनीष कुमार को मुकदमे के सभी अभिलेखों समेत दिन में ढाई बजे कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है।