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लक्ष्य 3.87 लाख, बने मात्र 9711 शौचालय

Sun, 20 Mar 2016 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोंडा
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बदहाल पड़े शौचालय - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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स्वच्छता मिशन को लेकर जिलाधिकारी भले ही गांव के हर घर में शौचालय बनवाकर गांवों को खुले में शौचमुक्त बनाने का अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहे हों, लेकिन जिले के अधिकारी इसके लिए जागरूक होने को तैयार नहीं हैं। इसी लापरवाही के चलते गांवों में शौचालय निर्माण की स्थिति काफी खराब है।
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इन गांवों में आवंटित किए गए लक्ष्य के मुताबिक फरवरी तक यहां महज पांच प्रतिशत शौचालयों का ही निर्माण हो सका है। इनमें भी जो शौचालय बन गए हैं, वह जागरूकता के अभाव में निष्प्रयोज्य पडे़ हैं। इन शौचालयों का इस्तेमाल करने के बजाय ग्रामीण इनमें भूसा व अन्य सामग्री रख रहे हैं।

स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने गांवों को खुले में शौचमुक्त बनाने का अभियान चला रखा है। इसके लिए जिले से लेकर ब्लॉक स्तर तक लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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इस अभियान को लेकर जिले के आला अफसर भले ही शौचालय निर्माण के लक्ष्यों को हासिल करने का ढिंढोरा पीट रहे हों, लेकिन धरातल पर इस अभियान की हालत काफी बद्तर है।

अगर जिले में शौचालय निर्माण के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि जिलाधिकारी के अभियान को पूरा कराने के लिए यहां के अधिकारी सिर्फ  जुबान ही चला रहे हैं। राज्य पोषण मिशन की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता लाने के लिए वित्तीय वर्ष 2015-16 में जिले की 994 ग्राम पंचायतों में कुल तीन लाख 87 हजार 53 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य तय किया गया था।

इन शौचालयों के निर्माण के साथ-साथ ग्रामीणों को इसके इस्तेमाल के लिए जागरूक किया जाना था, ताकि गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाया जा सके। लेकिन इस लक्ष्य को पूरा कराने के लिए लगाए गए अफसरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

आलम यह है कि फरवरी तक इन गांवों में सिर्फ 19 हजार 927 शौचालय ही बनवाए जा सके। भौतिक स्तर पर यह संख्या काफी बदतर नजर आती है। इनमें भी नियमित रूप से महज 9 हजार 711 शौचालय ही उपयोग में लाए जा रहे हैं, जबकि ज्यादातर शौचालय महज दिखाने के लिए बनवा दिए गए हैं।

ग्रामीण इलाकों में बनवाए गए इन शौचालयों में कहीं दरवाजा नहीं लगा है तो कहीं शौचालय की सीट ही गायब है। ग्रामीण इन शौचालयों का उपयोग भूसा व कंडा रखने के लिए कर रहे हैं।

स्वच्छता मिशन के तहत डीएम अजय कुमार उपाध्याय के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग व बाल विकास परियोजना के 31 अधिकारियों ने 60 गांवों को गोद लेकर स्वच्छता की अलख जगाने का संकल्प लिया था। इन गांवों में 24848 शौचालय बनाए जाने थे, लेकिन यहां महज 4985 शौचालय ही बनाए जा सके। अधिकारियों की लापरवाही के चलते इन शौचालयों में अधिकतर की हालत खराब है।
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