कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ अभियान में जुट गया है। कुपोषण को खत्म करने का सभी को मिलकर कार्य करने का संकल्प दिलाया गया है। आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व ग्राम प्रधानों को कार्यशाला में कुपोषण पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं।
दोनों ब्लॉकों के सभागार में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्य विकास अधिकारी रामाश्रय ने बुधवार को कहा कि सभी टीमें शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का वजन लेकर कुपोषण की जानकारी का पता लगाएं। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के इलाज की मुफ्त सुविधा जिला चिकित्सालय के पोषण पुनर्वास केंद्र पर किया जा रहा है।
कुपोषण से बचाने के लिए जन्म के तत्काल बाद मां का दूध बच्चे को हर हाल में पिलाया जाए। मां व बच्चे के खान-पान, साफ-सफाई व वजन वृद्धि का विशेष ध्यान रखा जाए। जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेन्द्र कुमार तिवारी ने कार्यशाला में गर्भवती महिलाओं के पौष्टिक एवं संतुलित खानपान के बारे में जानकारी दी।
सीएचसी पचपेड़वा के चिकित्साधिकारी डॉ. जलालुद्दीन खां, खंड विकास अधिकारी गैसड़ी दुर्योधन, पचपेड़वा गोविन्द प्रसाद शुक्ला, बाल विकास परियोजना अधिकारी गरिमा श्रीवास्तव आदि ने भी कार्यशाला में कुपोषण से निपटने के सुझावों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर दोनों ब्लॉकों की आशा, एएनएम, आंगन बाड़ी कार्यकर्त्रियों और ग्राम प्रधान मौजूद रहे।