फोटो-35-गोंडा में दयानंद शिक्षण संस्थान में पढ़ाई करते छात्र। -संवाद
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गोंडा। जिले में परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे चार लाख छात्रों को चार माह बीतने के बाद भी किताबें नहीं मिल पाई हैं। ट्रांसपोर्ट व्यवस्था सही न होने से किताबें पहुंच नहीं पा रही है। छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। शासन से न तो समय से टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई और न ही किताबों के आपूर्ति की व्यवस्था ही सही बनी। इसका खामियाजा स्कूल के बच्चों को भुगतान पड़ रहा है। पढ़ाई तो हो रही है, लेकिन बिना किताबों के कितनी कारगर होगी, यह सबके सामने है। मामला शासन स्तर की चूक से जुड़ा होने से जिले के अधिकारी चुप्पी साधे हैं, वह इंतजार के अलावा कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं।
जिले के 2611 परिषदीय स्कूलों में नवीन शैक्षिक सत्र पहली अप्रैल को बहुत उत्साह के साथ शुरू हुआ। उम्मीद थी एक माह में किताबें मिल जाएंगी और पढ़ाई को रफ्तार मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। पढ़ाया कैसे जाए, इसके लिए नए निर्देशों का सिलसिला चल रहा है। किताबों के न आने से चार लाख के करीब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है, जिसमें डेढ़ लाख से अधिक बच्चे तो नए प्रवेश वाले हैं। कई बच्चे ऐसे हैं जो बीते साल के हैं पढ़ाई में कमजोर हैं। उनके लिए अलग से क्लास की व्यवस्था की गई है, पर बिना किताब के उनकी तैयारी पर सवाल खड़ा है। बताया जा रहा है कि ट्रांसपोर्ट की लापरवाही से किताबें नहीं आ पा रहीं हैं। शासन से किताबें आएंगी, तभी ब्लॉकों के माध्यम से किताबों को स्कूल भिजवाया जाएगा। इसकी तैयारी विभाग ने जरूर कर लिया है। किताबों की जांच कराकर सीधे बीआरसी पर भेजा जा सके।
दो साल से पढ़ाई प्रभावित
परिषदीय स्कूलों से बीते दो सालों से कोविड संकट से पढ़ाई प्रभावित रही। इस बार पढ़ाई शुरू भी है तो किताबों की आपूर्ति न होने से समस्या बरकरार है। जिला समन्वयक विनोद जायसवाल कहते हैं कि पुरानी किताबों को एकत्र करने के निर्देश दिए गए थे। किताबों के आपूर्ति की जल्द ही उम्मीद है। जिले में तैयारी पूरी कर ली गई है, जिससे किताबों के मिलते ही आपूर्ति शुरू की जा सके।
किताबों के आपूर्ति शासन से शुरू है, जल्द ही जिले को भी किताबें मिल जाएंगी। जिसका सत्यापन कराकर स्कूलों के लिए भेज दिया जाएगा। अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए