शहरी गरीबों को मुफ्त में पक्का मकान देने के लिए समाजवादी सरकार की आसरा आवास योजना में रजिस्ट्री शुल्क का पेंच फंस गया है। इस पेंच के कारण चार माह से इन आवासों का आवंटन नहीं हो पा रहा है और गरीबों के लिए बनाए गए 288 आसरा आवास आवंटन की बाट जोह रहे हैं।
वर्ष 2012 में प्रदेश में सपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अल्पसंख्यकों व नगर क्षेत्र में रहने वाले गरीबों को शहर में ही पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आसरा आवास योजना की शुरुआत की थी। इन आवासों को बनाने की जिम्मेदारी नगरीय विकास अभिकरण डूडा को सौंपी गई थी। डूडा ने इस योजना के अंतर्गत जिले में 288 आवासों का निर्माण कराया है।
निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद जिला प्रशासन की ओर से आठ जून को इन आवासों का आवंटन किया जाना था। इसके लिए लाभार्थियों का चयन भी कर लिया गया था और उन्हें आवंटन की सूचना भी दे दी गई थी, लेकिन आखिरी वक्त पर आसरा आवासों के रजिस्ट्री शुल्क की अदायगी को लेकर मामला फंस गया और इन आवासों का आवंटन रोक दिया। इसके बाद से चार माह बीत चुके हैं, लेकिन आवासों का आवंटन नहीं हो पा रहा है।
डूडा के अधिकारियों का कहना है कि आवास के रजिस्ट्री शुल्क को लेकर शासन की तरफ से कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं जारी किया गया है। ऐसे में इन आवासों की रजिस्ट्री में लगने वाला शुल्क कौन वहन करेगा, इसका निर्धारण नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते आसरा आवासों का आवंटन अटका हुआ है।
आसरा आवास योजना के तहत जिले में 600 आवास बनाने की स्वीकृति दी गई थी। प्रत्येक आवास की लागत 4.15 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। इसके लिए प्रथम किश्त के तौर पर शासन ने करीब 12 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। प्रथम फेज में उपलब्ध राशि के सापेक्ष 288 आवासों का निर्माण ही हो सका। शेष आवासों का निर्माण राशि की कमी के कारण अटका हुआ है।