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दस सालों से अधूरा ही है युवाओं के सपनों का इंजीनियरिंग कालेज

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गोंडा। युवाओं को तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में करीब 44 करोड़ रुपये की लागत से राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण हो रहा है। साल 2007 में निर्माण की नींव रखी गई थी।
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सरकार बदलने से कालेज निर्माण की स्वीकृति रद्द हो गई। फिर साल 2016 में दोबार इंजीनियरिंग कालेज की नींव रखी गई। साल 2018 में कालेज में पढ़ाई शुरू होनी थी, लेकिन अभी कालेज के भवन का निर्माण ही हो रहा है।
शहर के उतरौला रोड स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक परिसर में बनने वाले इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण साल 2016 में दोबारा शिलान्यास सपा सरकार में हुुआ था। कॉलेज का निर्माण 43 करोड़ 83 लाख रुपये की लागत से शुरू हो रहा है। युवाओं का सपना था कि साल 2018 में कॉलेज के निर्माण के साथ जिले के युवाओं को अपने जिले में ही तकनीकी शिक्षा मिल सकेगी।
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सरकार ने जुलाई 2018 तक की समय सीमा निर्धारित की थी। वर्ष 2018 से कॉलेज में छात्रों को दाखिला मिलने की उम्मीद थी। लेकिन बजट के अभाव में अभी तक निर्माण कार्य रुका हुआ है।
माना जा रहा था कि इस साल कॉलेज का निर्माण हो जाएगा, लेकिन कार्य की धीमी चाल से ऐसा होते नहीं दिख रहा है। राजकीय इंजीनियरिंग कालेज का निर्माण यदि समय से पूरा हो जाता तो जिले में शिक्षा की नई तस्वीर दिखती। हर साल 240 छात्रों को प्रवेश मिलता और अब तक एक हजार के करीब छात्रों की पढ़ाई जिले में होती।
शहर के उतरौला रोड स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक परिसर में 10 एकड़ जमीन में इंजीनियरिंग कालेज का निर्माण हो रहा है। इस कॉलेज में 240 सीटें रहेंगी। निर्माण की लागत 43 करोड़ 83 लाख 84 हजार रुपये बताई गई है। फिलहाल इंजीनियरिंग कालेज का भवन बन गया है, और बजट के अभाव में कार्य रुका हुआ है। निर्माण को पूरा करने में कार्यदाई संस्था की लापरवाही भारी पड़ रही है।
साल 2007 में तत्कालीन प्राविधिक शिक्षा मंत्री योगेश प्रताप सिंह की ओर से पहली बार जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज के स्थापना को स्वीकृति मिली थी। पूर्व मंत्री योगेश सिंह कहते हैं उन्होंने महाराजा देवी बख्श सिंह सूचना एवं प्रौद्योगिकी कॉलेज की स्वीकृति दिलाई थी और 100 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ था।
इतना ही नहीं प्रवेश के लिए तय सीटों में 5 फीसदी कोटा जिले के छात्रों का था। सरकार बदलने से यह परियोजना रद्द हो गई। दोबार 2016 में कालेज की स्वीकृति इंजीनियरिंग कालेज तक सीमित रह गया और लागत घट गई। उन्होंने मांग किया कि जिले के छात्रों के लिए कोटा तय रहना चाहिए और जल्द ही पढ़ाई शुरू होनी चाहिए।
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इनसेट
- राजकीय इंजीनियरिंग कालेज के निर्माण की समीक्षा की जाएगी। निर्माण को पूरा कराने के लिए कार्यदाई संस्था से जानकारी की जाएगी।
- शशांक त्रिपाठी, सीडीओ
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