एमएलसी चुनाव में निरक्षर एवं अक्षम वोटरों के लिए हेल्पर बनाने के ठेकेदार सत्तारूढ़ दल के नेता बन गए हैं। रविवार को वोटर नहीं, बल्कि सपाइयों का एक दल वोटरों के आवेदन लेकर एडीएम न्यायालय पहुंच गया। इसकी सूचना मिलने पर भाजपा सांसद के प्रतिनिधि ने विरोध किया तो हंगामा खड़ा हो गया। एडीएम ने न्यायालय कुछ देर के लिए बंद करा दिया, मगर बाद में सपाइयों का आवेदन जमा कर लिया। इसको लेकर देर शाम तक हाईटेंशन ड्रॉमा चलता रहा।
एमएलसी चुनाव में निरक्षर व शारीरिक रूप से अक्षम वोटरों को सहायक देने के लिए रविवार को एडीएम न्यायालय में आवेदन करना था, मगर एक भी अक्षम वोटर वहां दोपहर बाद तक नहीं पहुंचा।
इसी बीच सपाइयों का एक दल वहां आ पहुंचा। भाजपा सांसद बृजभूषण शरण के प्रतिनिधि संजीव सिंह भी वहां पहुंच गए। सांसद प्रतिनिधि का आरोप है कि एडीएम ने समय समाप्त होने के बाद सपा प्रवक्ता विवेकमणि श्रीवास्तव व हरीराम यादव से 100-100 आवेदन जमा कर लिए, जिस पर दोनों नेताओं ने वोटरों का नहीं, बल्कि फर्जी हस्ताक्षर/अंगूठा लगाया था।
सांसद प्रतिनिधि ने जब विरोध किया तो वहां हंगामा होने लगा। पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को वहां से भगा दिया। इसी बीच कुछ देर के लिए एडीएम न्यायालय बंद करा दिया गया, मगर बाद में दोबारा न्यायालय खोला गया और कार्रवाई शुरू हुई।
कैसरगंज के भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रतिनिधि संजीव सिंह ने रविवार को चुनाव आयोग को पत्र भेजकर शिकायत दर्ज कराई है।
सांसद प्रतिनिधि ने आयोग को भेज पत्र में सपा प्रवक्ता व उनके साथियों पर निरक्षरों व अक्षमों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर/अंगूठा बनाकर आवेदन करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी ने 567 निरक्षरों व अक्षमों की जो सूची जारी की थी, उससे हटकर ऐसे लोगों का भी आवेदन किया गया है, जो निरक्षर व अक्षम नहीं हैं।
अपर जिलाधिकारी त्रिलोकी सिंह ने कहा कि एमएलसी चुनाव में निरक्षरों एवं अक्षम वोटरों का आवेदन कोई भी व्यक्ति कर सकता है। मगर उसकी छटनी करके सही व गलत निर्धारित किया जाएगा।
आवेदन करने के लिए आयोग की तरफ से 28 फरवरी तय थी, मगर उसमें कोई समय निर्धारित नहीं था। इसलिए आवेदन सभी दल के लिए जा रहे हैं। आरोप तो कोई भी लगा सकता है।