बीते पांच वर्षों से जिला पंचायत अध्यक्ष गोंडा की कुर्सी पर काबिज पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह की पत्नी विजय लक्ष्मी सिंह पर एक बार फिर से सपा ने अपना दांव आजमाया है। राजनीतिक दलों में एकमात्र सपा की ओर से ही विजय लक्ष्मी सिंह को पार्टी की तरफ से अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया गया है।
जबकि भाजपा, कांग्रेस और बसपा की ओर से जिला पंचायत सीट का चुनाव लड़ने वाले किसी प्रत्याशी के नाम की घोषणा अब तक नहीं की गई है। जिला पंचायत सीट के लिए होने वाला चुनाव अगले महीने जनवरी में होना प्रस्तावित है। जिसकी संभावित अधिसूचना 16-17 दिसंबर को जारी होने की बात कही जा रही है।
पूर्व मंत्री/करनैलगंज के विधायक योगेश प्रताप सिंह की पत्नी विजय लक्ष्मी सिंह को पांच साल पहले सपा ने अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर जिला पंचायत का चुनाव लड़ाया था।
इसमें उन्हें जीत मिलने के बाद सपा ने फिर से उन्हें इस चुनाव में पार्टी की ओर से अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है। विजय लक्ष्मी सिंह के मुताबिक बीते पांच वर्षों से वह अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करती आ रही हैं।
जिन जिला पंचायत सदस्यों को कभी जिला योजना में भागीदारी का अवसर नहीं मिला, उन्होंने जिला योजना में उनको भागीदार बनाया। जो उनके कार्यकाल की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है।
इतना ही नहीं जिले के विकास के लिए सड़क से लेकर नाली, खड़ंजे और तमाम काम उन्होंने जिला पंचायत से कराए हैं। सपा की ओर से उन्हें यह टिकट उनके जिला पंचायत में किए गए काम को देखकर ही दिया गया है।
भाजपा से नजदीकियों के शक में मंत्री पद से हटाए गए करनैलगंज विधायक योगेश प्रताप सिंह की पत्नी विजय लक्ष्मी को फिर से जिला पंचायत का टिकट देने के पीछे पार्टी का असली मतलब क्या है, यह बात हर किसी की समझ से परे है।
जानकारों की मानें तो यह सब कुछ पार्टी की ओर से डैमेज कंट्रोल पर काबू पाने के लिए किया गया है। क्योंकि जिला पंचायत सीट से योगेश फिर से अपनी पत्नी विजयलक्ष्मी को चुनाव लड़ाना चाहते थे। जिसका स्थानीय स्तर पर उन्हीं की पार्टी के एक कद्दावर मंत्री की तरफ से विरोध किया जा रहा था।
यहां तक कि इस सीट पर काबिज होने के लिए उन्होंने अपनी पुत्रवधू तक को निर्विरोध करा दिया था। इसके बावजूद दूसरे छोर से कनरैलगंज विधायक योगेश प्रताप सिंह इस सीट से चुनाव लड़ने की पैरवी करते रहे। जिसमें आखिरकार उन्हें सफलता भी मिली।
पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह की मानें तो यह फैसला पार्टी का है। पंडित सिंह पहले भी उनके साथ थे और आज भी हैं।