सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में लम्बे समय से लटके वादों के जल्द सुनवाई कर उसका तय समय में निस्तारण करने के लिए राजस्व संहिता 2006 में व्यापक संशोधन किया है। न्यायिक अफसरों के नये पद सृजित किये जाएंगे। नई व्यवस्था के तहत चकबंदी व सीलिंग को छोड़ कर 39 अधिनियम समाप्त किए जाएंगे।
नई संहिता में 334 धाराओं को जोड़ा गया है। जिले में इस समय करीब 15 हजार से अधिक राजस्व के मामले अलग अलग कोर्ट में लंबित हैं। नई राजस्व संहिता से वादों की सुनवाई व उसके निस्ताण में तेजी आएगी।
इस बाबत एडीएम त्रिलोकी नाथ सिंह का कहना है कि नई राजस्व संहिता से वादों के निस्तारण में तेजी आएगी। सरकार की ओर से बनायी गई नई व्यवस्था पर अमल शुरू किया जा रहा है।
राजस्व न्यायिक मजिस्ट्रेटों के सृजित होंगे नये पद
नई राजस्व संहिता के तहत नियमों के सही तरीके से पालन कराने व उनकी निगरानी निस्तारण के लिए राजस्व न्यायिक मजिस्ट्रेटों के पद सृजित किये जाएंगे। नये अफसरों में एडीएम, न्यायिक मजिस्ट्रेट, एसडीएम न्यायिक मजिस्ट्रेट व तहसील न्यायिक के अलाव एसडीएम न्यायिक तैनात होंगे। इन मजिस्ट्रेटों को स्थगन आदेश, अवमानना व उसके पुनरीक्षण की भी सुनवाई होगी।
तय समय में वादों का होगा निस्तारण
मजिस्ट्रेट वादों क ी सुनवाई करेंगे। इसमें दोनो पक्षकारों की हाजिरी भी कराएंगे। मजिस्ट्रेट संहिता के तहत संबंधित धाराआें के तहत वादों का निस्तारण करेंगे। किस धारा में कौन से वाद का निस्ताण कैसे करना है इसका मजिस्ट्रेटों को पालन करना होगा। ऐसा न हो पाने पर वह दूसरी तिथि निर्धारित करेंगे।