यूपी के गोंडा में आंखों में आंसू लेकर मां के लिए कफन व शव को सील करने की सुविधा शुल्क में छूट पाने के लिए झंझरी विकासखंड के पास पेरीगांव के रहने वाले हीरा सिंह सीएमएस व सीएमओ कार्यालय के चक्कर काट रहे थे। लेकिन, किसी भी जिम्मेदार का दिल नहीं पसीजा। अस्पताल आए एक अन्य व्यक्ति को दया आई तो उसने कफन व अन्य जरूरी चीजों का इंतजाम करवा दिया।
डॉक्टर ने जहरीला पदार्थ खाने की संभावना जताते हुए उपचार शुरू किया। बृहस्पतिवार को उनकी मौत हो गई। शव को अस्पताल के पास बने मोर्चरी में रखा गया है। वहां उपस्थित कर्मचारी लाश को सील करने के लिए कफन, लाश पैकिंग व अन्य संस्थान के लिए दो हजार रुपये मांग रहा है। वहीं 1200 रुपये वाहन के माध्यम से पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने का किराया भी मांगा गया है।
सीएमएस डॉ. अनिल तिवारी ने संवेदना तो जताई, लेकिन अस्पताल से लाश पैकिंग की व्यवस्था न होने का हवाला देकर सीएमओ के पास भेज दिया। यहां सीएमओ नहीं मिलीं। लेकिन, एक कर्मचारी ने जानकारी दी कि लाश को यहां से पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाने का जिम्मा पुलिस का है। वहां से भी निराश लौट रहे हीरा को करुणा सिंह नाम के व्यक्ति ने आर्थिक सहयोग कर कफन व लाश पैकिंग का इंतजाम कराया।
मेरे कार्यकाल में पहली घटना सामने आई है। जिसके पास कफन के लिए पैसे नहीं हैं। अभी मुझे जानकारी नहीं है कि यदि परिजनों के पास व्यवस्था न हो तो उसकी उपलब्धता की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है या पुलिस विभाग की। उच्च अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। -डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ
पुलिस की ओर से शव बैग में लाश को रखकर पोस्टमार्टम तक ले जाने की व्यवस्था है। मोर्चरी में किस कर्मचारी ने पैसे की डिमांड की इसकी जानकारी के लिए जांच कराई जाएगी। -संतोष मिश्र, नगर कोतवाल