गोंडा। करनैलगंज के नरायनपुर ललक में श्यामनाथ तिवारी के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। अवतार के प्रसंग की चर्चा करते हुए प्रवाचक शिवकिशुन शास्त्री ने कहा, जब-जब धरती पर पाप, अत्याचार व अनाचार बढ़ता है तब परमात्मा विविध रूपों में धर्म की स्थापना के लिए अवतरित होकर धरती का बाेझ कम करते हैं। प्रवाचक ने कहा, द्वापर युग में मथुरा के राजा उग्रसेन के पुत्र कंस ने पिता को कारागार में डालकर सत्ता अपने हाथ में ले ली। उसके अत्याचार से प्रजा त्राहि-त्राहि करने लगी। प्रजा की करुण पुकार सुनकर भगवान ने देवकी व वासुदेव के पुत्र के रूप में अवतार लिया। भगवान के अवतरित होते ही प्रभु के प्रताप से सभी पहरेदार सो गए। देवकी व वासुदेव की हथकड़ी और बेड़ी समेत कारागार के ताले खुल गए। वासुदेव बालक श्रीकृष्ण को लेकर यमुना पार नंदगांव ले गए और वहां से नंद यशोदा की कन्या को लेकर कारागार लौट आए। कन्या रूपी महामाया कंस को चेतावनी देकर अंतर्ध्यान हो गई। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर महिलाओं ने सोहर व बधाई गीत गाया।