गोंडा। जिले के 28 सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े की एसआईटी जांच की आंच कई बड़ों पर आना तय है। पूर्व में बीएसए रहे मनिराम सिंह एसआईटी टीम को बयान दर्ज करा चुके हैं। उनके निलंबन को लेकर सवाल उठाए जा रहे है। माना जा रहा है कि सहायता प्राप्त स्कूलों को अनुदान सूची में लिए जाने का फैसला शासन से होता है और शिक्षकों के वेतन अनुमन्यता के साथ मान्यता की कार्रवाई सहायक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में बनी समिति के स्तर से हुई है। पूर्व में भी जिले के शिक्षक भर्ती की जांच निदेशक व सचिव के स्तर से हुई है। अब एसआईटी हर बिन्दु की जांच करेगी।
जिले के 28 सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत 146 शिक्षकों की जांच में 76 शिक्षकों के बारे में कोई अभिलेख न होने और छह स्कूलों के मान्यता एवं अनुदान पर लिए जाने के आदेश नही हैं। यह गंभीर गड़बड़ी मानी जा रही है। मान्यता के बारे में बताया जा रहा है कि सहायक शिक्षा निदेशक अयोध्या के कार्यालय से पहले मान्यता जारी होती थी। अनुदान के आदेश शासन से जारी होते है। अभी फिलहाल पूर्व बीएसए मनिराम सिंह के बयान हुए हैं। कुछ अभिलेख भी जमा हुए हैं। अन्य अभिलेखों के लिए स्कूलों को पत्र भेजा गया है, अब एसआईटी के जांच अधिकारी पर सभी की निगाहें टिकी हैं कि मान्यता और अनुदान सबंधी आदेश के मामले में जांच का दायरा कहां तक पहुंचेगा।
हस्तक्षेप न करने की भेजी रिपोर्ट
शासन स्तर से सहायता प्राप्त स्कूलों की जांच के लिए हो रही कवायद को रोकने के लिए मुख्यमंत्री से प्रबंधक रुद्र बहादुर सिंह ने मांग की है। हियुवा के जिलाध्यक्ष शारदाकांत पांडे ने भी पत्र लिखा। इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय से रिपोर्ट मांगी गई। पुलिस जांच में मामले में कार्रवाई व हस्तक्षेप रोके जाने की रिपोर्ट आई। पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी के प्रभारी अधिकारी आईजीआरएस की ओर से सचिव मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप रोके जाने की रिपोर्ट 14 फरवरी को ही भेजी गई।