गोंडा। साहब, तीन दिन से दौड़ रहे हैं, लेकिन बायोमीट्रिक पहचान नहीं दर्ज हो पाई, इसलिए लाइसेंस नहीं बन सका। अब फिर आना पड़ेगा। बुधवार को संभागीय परिवहन कार्यालय के ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (डीटीआई) में पहुंचे आवेदक मछली गांव मनकापुर निवासी सुमित यह बात डाटा एंट्री ऑपरेटर राजेश गुप्ता से कह रहे थे।
इसी तरह शहर के सिविल लाइंस के रहने वाले शिव कुमार मिश्रा भी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए बायोमीट्रिक पहचान दर्ज कराने डीटीआई पहुंचे थे। उन्हें भी सरवर की समस्या बताकर वापस कर दिया गया। इससे पहले परसपुर के मोहना निवासी जिबराइल खान, करनैलगंज जहांगिरवा निवासी राहुल यादव व वजीरगंज के अशोकपुर टिकिया निवासी अमरान अली को भी सरवर में आई तकनीकी खराबी के कारण निराश लौटना पड़ा।
पिछले पांच दिनों से आरटीओ की सारथी साइट का सर्वर फेल है। इसलिए परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का काम पूरी तरह से बंद है। समस्या का समाधान कराने के लिए एआरटीओ ने मुख्यालय के अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है।
सर्वर में 22 मार्च को तकनीकी खराबी आ गई थी। इससे यह ठीक से चल नहीं पा रहा है। सिर्फ सुबह और शाम के समय कुछ देर के लिए रुक रुककर चलता है। इससे महज आठ से दस आवेदकों की ही बायोमीट्रिक हो पाती है। पिछले पांच दिनों करीब ढाई सौ आवेदकों को निराश लौटना पड़ा है। एआरटीओ आरसी भारतीय ने बताया कि सरवर में आई तकनीकी खराबी के कारण पिछले पांच दिनों से बायोमीट्रिक नहीं हो पा रही है। ऐसे में परमानेंट लाइसेंस नहीं बन पा रहे हैं। मुख्यालय से संपर्क कर खामियां दूर करने की अपेक्षा की गई है।