अंबेडकरनगर जिला अस्पताल में भर्ती बुखार से पीड़ित मरीज।
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एक तरफ सरकार कहती है कि प्रसूता महिलाओं की डिलीवरी संस्थागत स्वास्थ्य केन्द्रों यानी कि सरकारी अस्पताल में ही कराई जाए। लेकिन जिले के सरकारी अस्पताल हैं कि यहां आने वाले मरीजों का इलाज कराना तो दूर, अस्पताल प्रबंधन के लोग मानवता तक भूल चुके हैं। जिसका नजारा सोमवार को महिला अस्पताल में तब दिखाई दिया, जब दर्द से कराहती एक प्रसूता तीन घंटे तक अस्पताल के बेड पर पड़ी छटपटाती रही और उसे देखने कोई डॉक्टर ही नहीं आया। पत्नी की छटपटाहट जब पति से बर्दाश्त नहीं हुई तो वह उसे लेकर एक प्राइवेट अस्पताल चला गया।
सोमवार को जिले भर में रवीउलअव्वल की छुट्टी थी। इसलिए पुरुष और महिला अस्पताल की ओपीडी भी दोपहर के 12 बजते ही बंद हो गई। इसी बीच बहराइच रोड तिवारी पुरवा के ध्रुव कुमार अपनी पत्नी को लेकर डिलीवरी के लिए महिला अस्पताल पहुंचा।
ध्रुव के मुताबिक उन्होंने डिलीवरी की सारी जांचे करा ली थीं। ताकि डिलीवरी को लेकर किसी तरह का कोई खतरा न हो। सारी जांच रिपोर्ट लेकर वह डॉक्टर को दिखाने भी गए। वहीं दूसरी ओर उनकी पत्नी दर्द से पूरे तीन घंटे तक अस्पताल के बेड पर छटपटाती रही। बावजूद इसके अस्पताल का कोई डॉक्टर उसे देखने तक नहीं आया।
तीन घंटे में उसने कई बार जाकर अस्पताल के डॉक्टरों की गणेश परिक्रमा की। लेकिन उनकी पत्नी को देखने कोई डाक्टर नहीं आया। इस पर पत्नी को लेकर एक प्राइवेट अस्पताल आ गए। जहां उनकी पत्नी की हालत गंभीर बताई जा रही है।
इस बाबत जब प्रभारी सीएमएस डा. रामलखन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि फिलहाल तो उन्हें ऐसे किसी मामले की जानकारी नहीं है। लेकिन अगर ऐसा है तो इसके लिए शिकायतकर्ता को उनके पास आना चाहिए था।
फिलहाल वह ओटी (इमरजेंसी थिएटर) में व्यस्त हैं, कहते हुए फोन काट दिया। वहीं दूसरी ओर अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डा. आशुतोष गुप्ता का कहना है कि अगर इस तरह की कोई शिकायत उनके पास आती है तो इसे जरूर दिखवाया जाएगा।