प्रदेश में अधिकतम बाल मृत्यु दर वाले बलरामपुर जिले में अब बीमार पैदा होने वाले नवजात शिशुओं की अकाल मौत नहीं होगी। इन नवजातों के लिए जिला महिला चिकित्सालय में इलाज की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। बच्चों के इलाज के मामले में बलरामपुर जनपद अब देवीपाटन मंडल का अग्रणी जिला बन गया है।
अभी तक एसएनबीसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) की सरकारी सुविधा मंडल के किसी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। यहां पर अब एक साथ 12 बीमार नवजात शिशुओं का इलाज किया जा सकेगा।
यह बातें शनिवार को बलरामपुर के जिला महिला चिकित्सालय में सिक न्यू बार्न केयर यूनिट का लोकार्पण करते हुए सूबे के चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं जंतु उद्यान राज्यमंत्री डॉ. एसपी यादव ने अपने संबोधन में कहीं।
उन्होंने कहा कि बलरामपुर जिले में इलाज के अभाव में तमाम शिशुओं की अकाल मौत हो जाती थी। इसी समस्या को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जिले में बीमार नवजातों के इलाज की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई है।
जिला महिला अस्पताल में इस सुविधा के संचालन के लिए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार गुप्ता व अन्य स्टाफ की तैनाती भी की गई है। अस्पताल में एसएनबीसीयू के दो वार्ड बनाए गए है। प्रत्येक वार्ड में एक साथ 6-6 बच्चों को भर्ती किया जाएगा।
हर वार्ड के पास जच्चा रूम भी बनाए गए है, जहां बैठकर माताएं नवजात शिशुओं को स्तनपान कराएंगी। हर वार्ड में नवजातों के इलाज के लिए रेडिएंट वार्मर, फोटोथेरेपी तथा ट्रांसपोर्ट बेबी इनक्यूबेटर भी लगाया गया है।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि अस्पताल में अब कुल छह डॉक्टर तैनात हो गए हैं। यहां अब केवल रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली है। एसएनबीसीयू वार्ड में पहले दिन छह बीमार शिशुओं को इलाज के लिए भर्ती किया गया।
सीएमओ डॉ. आशुतोष गुप्ता ने बताया कि बलरामपुर में एसएनबीसीयू की सुविधा एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, इससे बाल मृत्यु दर में काफी कमी आएगी। इस मौके पर सदर विधायक जगराम पासवान, सीडीओ रवीश गुप्ता, एसपी सुधीर कुमार सिंह, डॉ. एके सिंघल व सपा जिलाध्यक्ष ओंकारनाथ पटेल आदि मौजूद रहे।