गोंडा। नब्ज देखकर दर्द बताने वाले यूनानी अस्पताल खुद डॉक्टरों के कमी से जूझ रहे हैं। तीन अस्पतालों में सिर्फ दो डॉक्टरों की तैनाती होने से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भटकना पड़ता है। डॉक्टर न होने से इलाज के नाम पर तैनात फार्मासिस्टों द्वारा महज रस्म अदायगी की जाती है।
पुराने रोगों से पीड़ित मरीजों का विश्वास यूनानी पैथी से इलाज कराने पर लगातार बढ़ रहा है। गैस, बवासीर, कब्ज, गठिया, पित्त से लंबे समय से पीड़ित मरीज यूनानी पद्धति का उपचार कराना बेहतर मानते हैं। जिले में तीन जगह संचालित यूनानी पैथी से जुड़े अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी से मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।
जिगरगंज मोहल्ले में स्थित 15 बेड के नगरीय अस्पताल में सिर्फ एक डॉक्टर हुमैरा बानो की तैनाती है। गौरा चौकी स्थित अस्पताल में डॉ. बुद्धप्रिय गौतम की तैनाती है, जबकि अलावल देवरिया स्थित यूनानी अस्पताल में तैनात डॉ.तरन्नुम निशा लंबी छुट्टी पर है। यहां सिर्फ फार्मासिस्ट के सहारे ही मरीजों का इलाज हो रहा है।
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. अरुण कुमार कुरील ने बताया कि यूनानी अस्पताल में डॉक्टरों के तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। तीन अस्पतालों में तीन चिकित्सकों की तैनाती है, लेकिन अलावल देवरिया की डॉक्टर तरन्नुम छुट्टी पर है।