करनैलगंज क्षेत्र में तबाही मचा रही घाघरा ने तरबगंज तहसील क्षेत्र के ऐली परसौली व सोनौली मोहम्मदपुर की तरफ बढ़ने लगी है। सोमवार को ऐली परसौली गांव के समीप घाघरा नदी उफान पर पहुंच गई। घाघरा की कटान के जद में आए सात लोगों के घर सोमवार की दोपहर घाघरा में समा गए।
पानी के बहाव के कारण लोग अपनी गृहस्थी भी नहीं बचा सके। घाघरा नदी में ऐली परसौली के रहने वाले राम मिलन, तेजबहादुर, लालबहादुर, तिलकराम, शांति, बद्रीनाथ व राम सजीवन का घर घाघरा की तेज धारा में समा गया। हलका लेखपाल रामशंकर ओझा ने बताया कि पीड़ित लोगों की सूची बनाई जा रही है।
तहसील प्रशासन को भेजी जाएगी। क्षेत्र में घाघरा की विनाश लीला तेज हो गई है। सोमवार को करनैलगंज क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित ग्राम पंचायतों की संख्या 31 हो गई तो नये प्रभावित 27 मजरों को लेकर बाढ़ प्रभावित कुल मजरों की संख्या 251 के पार पहुंच गई। जिसमें करीब 146 मजरे पूरी तरह से बाढ़ के पानी से लबालब भरे हुए हैं। इन मजरों में आने-जाने का सम्पर्क मार्ग कटा हुआ है। महज नावों के सहारे गांवों में जाया जा सकता है।
सोमवार को घाघरा का जलस्तर घटने लगा लेकिन खतरे के निशान से 70 सेटीमीटर ऊपर रही। तेजी से घटे घाघरा के पानी ने करनैगलंज क्षेत्र में अपना डेरा जमा लिया है। ग्राम नकहरा एवं काशीपुर के सामने से घाघरा की धारा पूरी तरह से करनैलगंज एरिया की ओर बह रही है।
घाघरा के तूफानी जलस्तर से क्षेत्र में पानी का शैलाब है। करनैलगंज तहसील क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर सोमवार को 31 हो गई है। जिसमें नकहरा, काशीपुर, प्रतापपुर, घरकुंइया, पूरे अंगद, भटपुरवा, दिवली, गौरासिंगपुर, बहुवन मदार मांझा, शिवगढ़, अतरसुइया, मोहम्मदपुर गड़वार, मांझा रायपुर, नन्दौर, चरसड़ी, रेक्सडिया, पूरे अजब, शाहपुर, नैनुआ जगन्नाथपुर, बसेरिया, इकनिया मांझा, चन्द्रभानपुर, टेंगनहा तथा चन्दापुर किटौली, रमवापुर, पसका शामिल हैं। इन ग्राम पंचायतों के बाढ़ से प्रभावित मजरों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक 251 मजरे प्रभावित हो चुके हैं।
सोमवार को 27 मजरे नये मजरे प्रभावित हुए हैं। जिले की सीमा पर बसी बाराबंकी जिले की पांच ग्राम पंचायतों परसावल, रायपुर, बेहटा, कमियार, नैपूरा व पारा के 44 मजरों का बुरा हाल है। जहां लगातार मजरों में पानी बढ़ने के साथ ही लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। करीब 146 इस कदर बाढ़ के पानी से घिरे हैं जहां तक आने जाने का कोई भी संसाधन प्रशासन के पास नहीं है। महज नावों के सहारे ही गांवों में जाया जा सकता है। सीमा पर बाराबंकी जिले के ग्राम पारा एवं उसके मजरा चरपुुरवा, बेहटा के मजरा नये पुरवा में घाघरा की कटान से मजरे का अस्तित्व करीब 70 फीसदी समाप्ति की ओर है।
बाढ़ का पानी जिस कदर तेजी से बढ़ रहा है। उससे ग्रामीणों में भय व्याप्त हो गया है। यदि बाढ़ की यही स्थिति रही तो बाढ़ की स्थिति भयानक होती जा रही है। गत वर्ष 2010-11 में आई बाढ़ से करनैलगंज तहसील की 72 ग्राम पंचायतों के 670 मजरे, 21 हजार 968 परिवारों की 1 लाख 8 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई थी तथा 10250 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि जलमग्न हो गई थी।