मनरेगा सहित अन्य विकास परियोजनाओं का विवरण बोर्ड लगाने का नियम है। यहां बोर्ड लगाने के नाम पर ही लाखों रुपये का खेल हो गया। परियोजनाएं शुरू हुईं और पूरी भी हो गईं, लेकिन बोर्ड नहीं लगा, पर बोर्ड के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान अवश्य कर लिया गया।
गोंडा में एक हजार परियोजनाएं ऐसी हैं जिनके कार्य पूर्ण दिखाए गए हैं, लेकिन इन परियोजनाओं पर बोर्ड नहीं लगाए गए और 3500 रुपये की दर से एक हजार परियोजनाओं पर बोर्ड की धनराशि करीब 35 लाख रुपये निकाल लिए गए।
मनरेगा की गाइड लाइन में प्रावधान है कि कोई भी परियोजना शुरू करने के पूर्व विवरण बोर्ड लगाया जाए, इस बोर्ड पर परियोजना की लागत, लंबाई, चौड़ाई, कार्यदाई संस्था का नाम व वर्ष, परियोजना पर व्यय धनराशि की पूरी जानकारी अंकित की जानी चाहिए।
इस बोर्ड का उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति परियोजना संबंधी पूरी जानकारी ले सकता है। संबंधित परियोजना में पारदर्शिता भी रहे, लेकिन यहां यह सब छिपाने के लिए लंबे पैमाने पर खेल हुआ। इसका खुलासा चल रही जांच के दौरान हुआ।
मनरेगा के तहत नवाबगंज ब्लॉक क्षेत्र में हरीराम के खेत से छब्बू के खेत तक खड़ंजा निर्माण कराया गया। परियोजना के लिए बिल संख्या 946 पर चार जून 2014 को 1,63,200 रुपये का भुगतान किया गया। इसी परियोजना पर बिल संख्या 946 पर दो जून 2014 को भी 1,63,200 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। जांच अधिकारी जिला विकास अधिकारी डीपी सिंह ने उक्त परियोजना पर दो बार भुगतान होने के बाद गबन/दुरुपयोग होने की श्रेणी में रखा है।
इस संबंध में सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने शिकायत की थी। जिस पर देवीपाटन मंडल के आयुक्त रविप्रकाश अरोड़ा के निर्देश के क्रम में डीएम के आदेश पर जिला विकास अधिकारी डीपी सिंह ने नवाबगंज ब्लॉक क्षेत्र में मनरेगा से कराए गए विकास कार्यों की जांच की। जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को दी गई है।