नवाबगंज के साकीपुर गांव में नदी की चपेट में आया खेत। संवाद
गोंडा। बारिश तो जिले में थम गई है मगर बैराजों से छोड़े गए पानी से सरयू नदी उफान पर है। ऐसे में नदी का पानी तरबगंज क्षेत्र के गांवों तक पहुंच गया है। नवाबगंज के गांवों में तमाम खेत नदी की कटान की जद में आ गए हैं। वहीं, करनैलगंज क्षेत्र के तटबंधों में रेनकट की आशंका है। बेलसर विकासखंड अंतर्गत ऐली परसौली के पास भिखारीपुर-सकरौर तटबंध की स्थिति नाजुक बताई जा रही है। खेत, खलिहान और फसलों को सरयू ने निगलना शुरू कर दिया है।
करनैलगंज क्षेत्र में अभी बाढ़ का तो खतरा नहीं है मगर नकहरा गांव के पास तटबंध की स्थिति संवदेनशील है। जहां बाढ़ कार्य खंड के अधिकारी नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल एलगिन ब्रिज के पास नदी खतरे के निशान से 1.20 मीटर दूर है। वहीं, नदी में बैराजों से 1,23,457 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिससे तरबगंज क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। तरबगंज और नवाबगंज क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से ढेमवा मार्ग बंद हो चुका है। तेज लहरों ने कटान शुरू कर दी है।
साखीपुर व दत्तनगर के बाड़ी माझा में तीन परिवारों का आशियाना जलमग्न हो गया। सोनू यादव का एक छप्पर व चार बीघे गन्ने का खेत कटान में बह गया। वहीं, सिंचाई का इंजन नदी में बह गया। उनके पड़ोसी नंदलाल यादव का पांच बीघे गन्ने का खेत व पांच बीघे खाली पड़ा खेत कटान की जद में आ गया है। गांव के ही रामसुफल यादव के दो छप्पर, एक चारा मशीन के साथ ही पांच बीघे गन्ना व पांच बीघे धान लगाने को तैयार खेत में भी कटान हो गई है। शनिवार को कटान ने गृहस्थी का सामान भी निगल लिया। अचानक शुरू हुई कटान ने देखते ही देखते लोगों का काफी नुकसान कर दिया। कटान का खतरा अब भी बना हुआ है।
गांव के लेखपाल ओमप्रकाश वर्मा का कहना है कि नुकसान की जानकारी हुई है। रिपोर्ट तैयार की जा रही है। गांव में राहत सामग्री वितरित की जाएगी। अपर जिलाधिकारी सुरेश सोनी का कहना है कि बाढ़ की स्थिति पर नजर बनी है। राजस्वकर्मियों को सतर्क कर दिया गया है।
रविवार को मौसम ने एक बार फिर पलटी मारी। शनिवार को रुक-रुककर बरसात हुई। रविवार को बादल तो छाए रहे मगर बारिश नहीं हुई। इससे लोग उमस और चिपचिपी गर्मी से परेशान रहे। वहीं हवा के न चलने से देर रात या सोमवार को बारिश की संभावना बनी रही। फिलहाल बीते दिनों हुई बारिश से कई गावों में जलभराव की समस्या भी हो गई है।