करनैलगंज (गोंडा)। विभिन्न बैराजों से छोड़े जा रहे पानी तथा बारिश के चलते सरयू का जलस्तर घटने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार शाम को करीब तीन लाख 15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया जो मंगलवार से एल्गिन चरसड़ी तक पहुंचेगा।
सरयू में उफान के चलते मांझा रायपुर गांव पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। रविवार तक खतरे के निशान से करीब 41 सेमी ऊपर बह रही सरयू नदी के जलस्तर में सोमवार को कमी दर्ज की गई। सोमवार शाम चार बजे तक सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 39 सेंटीमीटर ऊपर ठहरा था। इसके साथ ही बांध व नदी के बीच बसे गांवों में सरयू के बाढ़ का पानी लगातार आ रहा है। बांध की जद में आने वाले गांवों में पानी भरने से रास्ते व फसलें पहले से जलमग्न हो चुकी हैं। पानी कम होने लगा था कि एक बार फिर सरयू का जलस्तर बढ़ गया। बाढ़ के हालात के चलते पशुओं के चारे का भी संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ खंड के सहायक अभियंता अमरेश सिंह का कहना है कि संवेदनशील स्थानों पर लगातार कार्य किया जा रहा है। खतरे की कोई स्थिति नहीं है।
उपजिलाधिकारी भारत भार्गव का कहना है कि प्रभावित गांवों पर नजर रखी जा रही है। नावों की व्यवस्था भी कराई जा रही है। पसका, बहुवन मदार माझा, नकहरा गांवों में बाढ़ चौकी को सक्रिय कर दिया गया है। यहां राजस्व निरीक्षक व लेखपाल की अगुवाई में बाढ़ चौकी के माध्यम से लोगों की जरूरत के मुताबिक व्यवस्था कराई जा रही है।
वहीं, विश्नोहरपुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गावों का सोमवार को उपजिलाधिकारी तरबगंज विशाल कुमार ने दौरा किया। स्थिति का जायजा लेने के साथ ही पानी से घिरे मजरों के लोगों को लंच पैकेट भी वितरित कराए। साकीपुर, दत्तनगर व ब्यौंदा माझा गांव बाढ़ से अधिक प्रभावित हैं। सोमवार शाम छह बजे पहुंचे उपजिलाधिकारी ने बाढ़ के हालात का जायजा लिया। उन्होंने लेखपाल ओमप्रकाश वर्मा को कटान प्रभावित लोगों का ब्योरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। प्रभावित लोगों को मुआवजा दिलाने की बात कही। साकीपुर में 570 व दत्तनगर में 500 लंच पैकेट वितरित किए गए। दत्तनगर में लोगों ने और नावें उपलब्ध कराने की मांग की। जिस पर उन्होंने लेखपाल को नाव, किट व अन्य जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराने के लिए सूची देने का निर्देश दिया।