रुपईडीह। पुल पर रेलिंग होती तो शायद पैर फिसलने से बिसुही नदी में डूबकर राशिद की जान न जाती। उसे रोकने के लिए एक अवरोध होता और संभलने का मौका मिलता। बिसुही नदी पर बने उस पुल पर यही सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। अब इस कमी की कीमत वसीम उर्फ ननकऊ का परिवार अपने 11 वर्षीय बेटे राशिद को खोकर चुका रहा है।
बहराइच के विशेश्वरगंज क्षेत्र के गेंधरिया निवासी राशिद वीरपुरभोज के पास बिसुही नदी पर बने बिना रेलिंग वाले पुल से चार दिन पहले गुजर रहा था। उस समय बिसुही नदी में उफान था और पुल के ऊपर से पानी बह रहा था। इससे राशिद का पैर फिसल गया। रेलिंग नहीं होने के कारण वह नदी में बह गया। हादसे में उसकी मौत हो गई।
विभागीय जानकारी के अनुसार, सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम के उपखंड चतुर्थ के अंतर्गत बिसुही नदी के 21 जर्जर पुलों की मरम्मत और नवनिर्माण के लिए वर्ष 2020-21 में शासन से 11 करोड़ 30 लाख रुपये मिले थे। इनमें 17 पुलों का निर्माण कराया गया, जबकि वीरपुरभोज और सिसई माफी समेत चार पुलों की मरम्मत नहीं हो सकी। विभाग में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इन पुलों पर पांच करोड़ 74 लाख रुपये खर्च किए गए। शेष राशि के संबंध में अधिकारी कोई जानकारी नहीं दे सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन अधिकारियों ने मौजूदा पुल को ठीक बताकर उसका निर्माण नहीं कराया। इसके विपरीत नदी की सफाई के लिए मिले 90 लाख रुपये से 20 नालों की सफाई कराई गई। इनमें पेड़ारन, बिसुही, जेहदा, जानकी नगर और चुर्रा-मुर्रा समेत अन्य नाले शामिल हैं।
बजट मिलते ही लगेगी रेलिंग : मयंक राज
विभागीय अभियंताओं का कहना है कि वीरपुरभोज और सिसई माफी के पुलों की मरम्मत और रेलिंग के लिए प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन शासन से स्वीकृति नहीं मिली। अधिशासी अभियंता मयंक राज सिंह ने बताया कि शासन से पत्राचार किया जा रहा है। बजट मिलते ही प्राथमिकता के आधार पर काम कराया जाएगा।