बहुवन मदार माझा में टमाटर सुखातीं साधना सिंह। स्रोत: स्वयं
पसका (गोंडा)। खेती-किसानी सिर्फ पुरुषों का ही काम नहीं है। कारोबार की तरह ही इससे भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। ये कर दिखाया है परसपुर के बहुवन मदार माझा (देवीगंज) की उन्नतशील किसान व स्वरोजगारी साधना सिंह ने। गृहिणी से किसान बनीं साधना के एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) का सालाना टर्नओवर 60 लाख रुपये से अधिक है। उनसे प्रेरणा लेकर क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी घर की चारदीवारी से निकलकर पुरुषों के साथ खेती-किसानी कर रही हैं।
साधना सिंह उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद घर का कामकाज संभाल रही थीं। मगर वह स्वरोजगार करना चाहती थीं। परिवार के पुरुष खेती करते थे, लेकिन परंपरागत खेती में जितनी लागत किस्तों में लगती थी, उससे कम आमदनी ही होती थी। परिजनों का दर्द देखकर साधना ने खेती में नवाचार करने की रणनीति तैयार की। परिजनों से अनुमति लेकर उन्होंने किसान उत्पादक संगठन के बारे में जानकारी लेकर चार्टर्ड अकाउंटेंट से कंपनी एक्ट में पंजीकरण कराया। अवध एग्रीकल्चर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी नाम से एफपीओ का कृषि विभाग में पंजीकरण कराकर पशुपालन शुरू किया। वह डेयरी पर दूध न बेचकर खुद मक्खन और घी निकालकर पैकिंग कर बेचने लगीं। अवध गोल्ड नाम से उनका मक्खन, घी और छाछ बिकने लगा। आमदनी बढ़ती देखकर 894 किसान उनके एफपीओ से जुड़कर अच्छे मूल्य पर अपनी उपज बेच रहे हैं।
ऑफ सीजन में भी करती हैं टमाटर व मशरूम की आपूर्ति
साधना ने अपने घर में सोलर ड्रायर मशीन लगा रखी है। जब टमाटर सस्ता होता है तो उसे बड़ी मात्रा में खरीद लेती हैं। जिसे ड्रायर मशीन से सुखाकर पैकिंग कर रख लिया जाता है। इसी प्रकार मशरूम को भी सुखाकर पैकिंग करती हैं। फिर टमाटर का सीजन खत्म होने के बाद इंदौर की बड़ी कंपनी को अच्छे भाव में सूखा टमाटर व मशरूम बेचती हैं। इससे ज्यादा मुनाफा होता है। साधना बताती हैं कि सूखे टमाटर से सॉस, केचप आदि तैयार किया जाता है। उनका एफपीओ मुर्गी पालन भी करता है। एफपीओ का सालाना टर्नओवर 60 लाख रुपये से अधिक है।
एफपीओ से जुड़े किसानों को मिलता नकद भुगतान
साधना के एफपीओ से मौजूदा समय में 894 किसान जुड़े हैं। एफपीओ के माध्यम से इन किसानों से गेहूं, धान, मक्का की खरीद कर नकद भुगतान कर दिया जाता है। इन किसानों को बाजार भाव या एमएसपी से अधिक दाम मिल जाता है। ये अनाज आईसीटी, पतंजलि, रिलायंंस जिओ मार्ट आदि को बेचा जाता है। पशुपालक किसानों से एफपीओ के माध्यम से दूध भी खरीदा जाता है।