गोंडा। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और आतंकी संगठनों के हिमायती सद्दाम शेख की गिरफ्तारी के बाद एटीएस की तफ्तीश ने रफ्तार पकड़ ली है। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (यूपीएटीएस) के हाथ सद्दाम शेख का आठवीं का प्रमाणपत्र भी लगा है। उसने प्रमाण पत्र पूर्व विधायक रमेश गौतम के स्कूल लाॅर्ड गौतमबुद्ध इंटर कॉलेज से हासिल किया था। यूपीएटीएस प्रमाणपत्र की तस्दीक के लिए स्कूल भी गई और अभिलेखों से मिलान किया।
आठवीं कक्षा के इसी प्रमाणपत्र के सहारे सद्दाम ने परिवहन विभाग से ड्राइविंग लाइसेंस भी जारी कराया था। माना जा रहा है कि एटीएस सद्दाम को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और प्रमाणपत्र तैयार कराने में सहयोग करने वालों की भी जांच हो सकती है। अभी तक सद्दाम के मूल निवास का पता नहीं लग सका है। इससे उससे संबंधित अभिलेखों की पड़ताल हो रही है।
करनपुर के पठानपुरवा में अपना आशियाना बनाने के बाद सद्दाम ने शैक्षिक अभिलेख भी तैयार कराया। पास में ही खुले पूर्व विधायक रमेश गौतम के प्रबंधन वाले स्कूल लाॅर्ड गौतमबुद्ध इंटर कॉलेज करनपुर से उसने बहुत ही आसानी से आठवीं का प्रमाणपत्र हासिल कर लिया। उसकी पत्नी रूबीना ने इस बात को कुबूल किया और बताया कि मेरा शौहर ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है। बड़े वाहन को चलाने का लाइसेंस उसे कैसे मिल गया, इसकी भी जांच हो सकती है।
स्कूल की आंतरिक कमेटी कर रही जांच, एटीएस को सहयोग
सद्दाम को कैसे आठवीं का प्रमाण-पत्र मिला, इसकी जांच के लिए स्कूल में आंतरिक कमेटी गठित की गई है। एटीएस की टीम स्कूल गई थी। स्कूल प्रशासन ने पूरा सहयोग किया। आगे भी यूपीएटीएस को जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। मैं खुद भी नजर रख रहा हूं। कोई भी नई जानकारी मिलने पर एटीएस को अवगत करा दिया जाएगा।
- रमेश गौतम, पूर्व विधायक व प्रबंधक लार्ड गौतम बुद्ध इंटर कॉलेज करनपुर
करनपुर में पांव जमाने के बाद शुरू की थी तैयारी
सद्दाम शेख पहले क्या था और क्या करता था, यह किसी को नहीं पता। लेकिन 19 साल पहले वह जब करनपुर के पठानपुरवा में पहुंचा और खुद को स्थापित कर ले गया तो आगे की तैयारी करने लगा। मकान बनाने के बाद शादी रचाकर स्थानीय रिश्तेदारी बनाने का काम किया। इसके साथ ही आधार कार्ड, पैनकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और शैक्षिक अभिलेख भी जुटाए। जिससे उसे आगे चलकर कोई दिक्कत न हो। अब एटीएस उसके हर कदम की पड़ताल कर रही है।
व्यवहार से गांव वालों का जीता दिल, अब है गुस्सा
गोंडा। करनपुर के पठानपुरवा में सद्दाम को लोग कई वर्षों से जानते थे। आज जब चर्चा करते हैं तो भौचक्के हो जाते हैं। लोग कहते हैं कि वह बहुत सीधा बनके रहता था, लोगाें के काम भी कर देता था। व्यवहार ऐसा था कि कोई भी सहज ही भरोसा कर ले।
उसके रिश्तेदार किस्मत अली कहते हैं कि वह कहीं झगड़ा हो रहा हो तो हट जाता था। इस तरह वह किसी भी वाद-विवाद में भी नहीं पड़ता था। अब जो करतूत सामने आई है, उससे उसपर सिर्फ गुस्सा लग रहा है।
सद्दाम ने अपने व्यवहार से पठानपुरवा के साथ ही नरायनपुर मर्दन के लालापुरवा के लोगों का भी दिल जीत लिया था। उसके स्वभाव का ही असर रहा कि करनपुर के पूर्व प्रधान स्व. कल्लन खां ने उसकी सहायता की। जमीन देने के साथ ही स्थानीय स्तर की मदद की। लोगों की मानें तो सद्दाम का यह रूप कभी किसी ने नहीं देखा था। अब एटीएस की रिपोर्ट पर हर किसी की आंखों में सद्दाम के प्रति नफरत दिख रही है। यहां तक की उसकी पत्नी रूबीना भी कहती हैं कि वह ऐसा होगा, कभी सोचा नहीं था। पहले पता चलता कि वह किसी तरह से गलत हरकत में है तो वह खुद पुलिस को जानकारी दे देती।