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2600 स्कूलों में रोली-चंदन से होगा नौनिहालों का स्वागत

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गोंडा। कोरोना काल में 11 महीने बाद प्राइमरी स्कूलों में एक मार्च से पढ़ाई शुरू होगी। कक्षा एक से पांचवीं तक के स्कूलों को बच्चों के स्वागत के लिए सजाया जाएगा। स्कूलों में गुब्बारों, झालरों और अन्य सजावटी सामान से सजाने के साथ ही पूरे उत्साह के साथ पढ़ाई का आगाज होगा। स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय व पीने के पानी की व्यवस्था दुरुस्त होगी। इसके साथ ही कोरोना प्रोटोकॉल लागू करने के लिए शिक्षकों को हिदायत दी गई है।
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प्राइमरी स्कूलों में कक्षा एक से पांचवीं तक की पढ़ाई के लिए समय सारणी तय की गई है। एक मार्च से स्कूल आने वाले बच्चों को अच्छा माहौल देने के लिए स्कूलों को सजाया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों में सजावट की तैयारियां शुरू की है। बच्चों के स्वागत के लिए स्कूल की कक्षाओं व गेट को रंगीन गुब्बारों, फूलों व रंग बिरंगी झालरों से सजाया जाएगा।
टीका लगाकर बच्चों का स्कूल में स्वागत किया जाएगा। स्कूलों में बच्चों के पीने के पानी के लिए पेयजल की उचित व्यवस्था की जाएगी। जानकारों की मानें तो शिक्षकों को कंपोजिट ग्रांट से रनिंग वाटर की व्यवस्था करनी होगी।
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इसके अलावा लड़कियों के लिए शौचालय की अलग व्यवस्था की जाएगी। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों का कायाकल्प किया जा रहा है। स्कूल भवनों व कक्षाओं की दीवारों को आकर्षक पेंटिंग, स्लोगन से सजाया गया है।
स्कूलों को स्मार्ट क्लास व लाइब्रेरी से लैस किया गया है। जिले में 2600 के करीब प्राइमरी स्कूल हैं जहां अभी शिक्षक तो आ रहे हैं लेकिन पढ़ाई नहीं हो रही है। इस बार पढ़ाई में गतिविधियों पर विशेष जोर रहेगा।
जिले के 900 स्कूलों में पहले से ही पढ़ाई हो रही है। 10 फरवरी से कक्षा 6 से 8 तक के करीब एक लाख बच्चों की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। अभी स्कूलों में दिन वार कक्षा तय करके पढ़ाई कराई जा रही है।
इसी तरह समय सारणी के आधार पर प्राइमरी स्कूलों में भी बच्चों को स्कूल बुलाया जाएगा। स्कूलों में ज्यादा भीड़ न हो इसके लिए हिदायत दी गई है। शिक्षकों को एक महीने से संकुल बैठकों के माध्यम से पढ़ाई के तरीके बताए जा रहे हैं।
परिषदीय स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई बंद होने से शिक्षा की गुणवत्ता में कमी न होने पाए, इसके लिए अभिभावकों का भी सहयोग लिया जाएगा। उन्हें जागरूक करने के लिए शिक्षक शिक्षा चौपाल लगाएंगे और पढ़ाई में अभिभावकों को उनके योगदान के बारे में बताएंगे। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
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