नवाबगंज के माझा में भरा बाढ़ का पानी। - संवाद
गोंडा। सरयू अब खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर नीचे चली गई है। इससे बाढ़ के संकट से राहत मिली है। हालांकि कटान का खतरा बना हुआ है। वहीं, 84 गांवों में पानी कम होने से गंदगी बढ़ गई है। इन गांवों के लोग कई तरह की दुश्वारियां झेल रहे हैं। संक्रामक रोग बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हैं।
तरबगंज तहसील के तुलसीपुर माझा, ब्योंदा दत्तनगर, साखीपुर के गांवों में संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। करनैलगंज के नैपुरा, रायपुर, बांसगांव, कमियार के कई गांवों में बाढ़ का संकट बना हुआ है। ऐली-परसौली व चंदापुर किटौली के पास तटबंध पर खतरा बढ़ गया है। तटबंधों की ड्रोन से निगरानी की जा रही है, जिससे कटान होने की जानकारी पर वहां सुरक्षा के प्रबंध किए जा सकें। एडीएम सुरेश सोनी ने बताया कि बाढ़ पीड़िताें की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है।