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हाईकोर्ट ने एसपी को किया तलब

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गोंडा। छह माह पहले नगर के आशाराम बापू आश्रम में संदिग्धावस्था में मिली किशोरी की हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। किशोरी की मां की ओर से दाखिल रिट याचिका की सुनवाई के दौरान पुलिस की लचर कार्रवाई पर असंतोष जताया है। सोमवार को सुनवाई की अगली तिथि निश्चित कर अदालत ने विवेचक समेत पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया है। याची की मांग पर हाईकोर्ट इस मामले को सीबीआई को भी सुपुर्द कर सकता है।
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कोतवाली नगर क्षेत्र के ग्राम बिमौर में लापता किशोरी का शव सात अप्रैल 2022 की रात संदिग्धावस्था में गांव में स्थित संत आशाराम बापू आश्रम में खड़ी ऑल्टो कार के अंदर मिला था। उसकी मां गीता पांडेय ने पांच अप्रैल को ही उसके गायब होने की सूचना कोतवाली नगर पुलिस को दी थी। पुलिस से संपर्क कर खोजबीन का अनुरोध भी किया था। पुलिस ने न तो गुमशुदगी दर्ज की और न ही उसे खोजने का कोई सार्थक प्रयास किया। मगर शव मिलने के बाद पुलिस ने पहले से प्राथमिकी दर्ज होने की बात कही।
इधर, पुलिस की सुस्त कार्यशैली से विवश होकर पीड़ित मां ने अधिवक्ता गणेश नाथ मिश्र के माध्यम से उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल कर न्याय की गुहार लगाई थी। न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक को नोटिस देकर जवाब-तलब किया था। पुलिस अधीक्षक ने जवाब और हलफनामा दाखिल कर पुलिस की कार्रवाई को उचित बताया। एसपी के हलफनामे में बिंदुवार जवाब न होने पर न्यायालय ने असंतोष जताते हुए पूछा कि जब पांच अप्रैल 2022 को याची ने बेटी के गुमशुदगी की सूचना दे दी तो उस समय एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई।
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कड़ी नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने 17 अक्तूबर 2022 को सुनवाई की तिथि निर्धारित कर एसपी व विवेचक को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर सभी बिंदुओं का जवाब देने व सूचना के बाद त्वरित एफआईआर न दर्ज करने के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अधिवक्ता गणेश नाथ मिश्र ने बताया कि उच्च न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, और उनकी मांग के अनुसार मामले की विवेचना सीबीआई के सुपुर्द की जा सकती है। प्रकरण में एसपी आकाश तोमर ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेेश का पालन किया जाएगा।
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