करनैलगंज/विश्नोहरपुर। सरयू नदी के घटते जलस्तर ने लोगों को राहत दी है, लेकिन अब कटान तेज होने का खतरा बढ़ गया है। नदी में घटते पानी से कटान की रफ्तार बढ़ जाती है। इस वजह से माझावासी परेशान हैं। उनका कहना है कि खेत में धान व गन्ने की फसलें लगी हैं। कटान तेज होने से जमीन के साथ फसलें भी नष्ट हो जाएंगी। उधर, नवाबगंज क्षेत्र में रविवार को भी बाढ़ पीड़ितों को लंच पैकेट नहीं बांटे गए।
नवाबगंज के साकीपुर के चहलावा व दत्तनगर के बाड़ी माझा में खेत कटने का भय सताने लगा है। दोनों गांवों के बाढ़ पीड़ितों को अब तक कोई राहत सामग्री का वितरण भी नहीं किया गया है। इसको लेकर लोगों में नाराजगी दिख रही है। वहीं, ब्योंदा माझा गांव अब भी पूरी तरह बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। इसके बावजूद रविवार को सरकारी नावें बंद करा दी गईं। जानकारी करने पर ठेकेदार इंद्रदेव निषाद ने बताया कि सरकारी नाव बंद करने का आदेश मिला है।
एसडीएम तरबगंज विश्वामित्र ने बताया कि क्षेत्र में पानी घट रहा है। जिन रास्तों पर पानी भरा है, वहां नावें बंद नहीं कराई जाएंगी। ग्राम प्रधान केशवराम ने बताया कि रविवार को लंच पैकेट नहीं बांटे गए। जबकि कई परिवार बाढ़ से प्रभावित होने के कारण सड़क पर ही रह रहे हैं। बाढ़ से गांवों के हालात बदतर हो चुके हैं। मवेशियों को तो खेत में लगी हरी फसल का चारा मिल रहा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों को भोजन नसीब नहीं हो रहा है।
सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.070 के सापेक्ष 106.140 मीटर पर है। इस तरह नदी खतरे के निशान से सिर्फ सात सेंटीमीटर ऊपर है। डिस्चार्ज तीन लाख क्यूसेक चल रहा है। किसानों की खेती योग्य जमीन कटान की जद में है। कटान के डर से किसान अपने खेतों की फसलें काटकर जानवरों के लिए चारा तैयार कर रहे हैं।
ओमप्रकाश, शिवकुमार, लक्ष्मण, शिव आशीष, सोहनलाल, वंशराज का कहना है कि फसल बाढ़ के पानी में डूब चुकी थी। एक सप्ताह तक डूबी फसल अब सड़ने लगेगी। इस वजह से इसे काटकर जानवरों को खिलाया जा रहा है। प्रशासन द्वारा बाढ़ पीड़ितों को मिलने वाली इमदाद भी बंद कर दी गई है। ग्रामीणों का जीवन अब भगवान भरोसे चल रहा है।
एसडीएम करनैलगंज जितेंद्र गौतम का कहना है कि पानी अब घटने लगा है। जब तक गांवों में पानी अधिक था, तब तक ग्रामीणों के खानपान की व्यवस्था कराई गई। अब भी जहां पानी अधिक है, वहां सहायता सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।